चंडीगढ़ , 24 मार्च 2026 । पंजाब में आम लोगों के हक को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भगवंत मान सरकार ने नंगल में 800 एकड़ से अधिक सरप्लस जमीन का मालिकाना हक स्थानीय निवासियों को देने का निर्णय लिया है। इस जानकारी को राज्य के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने साझा किया।
जल संसाधन विभाग ने 800 एकड़ से अधिक ऐसी जमीन के संबंध में बी.बी.एम.बी. के साथ औपचारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। श्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “हमारे बुजुर्गों ने जमीनें भी दीं और अपने हाथों से काम भी किया ताकि एक नए स्वतंत्र भारत को पानी और बिजली मिल सके। उन्होंने इस शहर को बनाने में भी अहम योगदान दिया। फिर भी पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से इस प्रोजेक्ट को चलाने वाली अथॉरिटी बी.बी.एम.बी. ने मालिकों जैसा व्यवहार करना शुरू कर दिया और उन्हीं लोगों को परेशान किया, जिन्होंने इसे बनाया था।”
यह जमीन लंबे समय से विभिन्न कारणों से सरकारी या संस्थागत नियंत्रण में थी, लेकिन अब सरकार ने इसे वास्तविक निवासियों के नाम करने का फैसला किया है। इस कदम से हजारों परिवारों को कानूनी स्वामित्व मिलेगा, जो वर्षों से इस जमीन पर रह रहे थे लेकिन अधिकारों से वंचित थे।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल लोगों को स्थायित्व और सुरक्षा मिलेगी, बल्कि वे अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग भी कर पाएंगे। इससे स्थानीय विकास, आवास सुधार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हरजोत सिंह बैंस के अनुसार, इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें पात्रता की जांच और दस्तावेजों का सत्यापन शामिल होगा, ताकि सही लाभार्थियों तक ही इसका फायदा पहुंचे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय और भूमि सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में प्रशासनिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जैसे जमीन का सही रिकॉर्ड, विवादों का समाधान और वितरण की प्रक्रिया।
कुल मिलाकर, भगवंत मान सरकार का यह फैसला पंजाब में जमीन से जुड़े लंबे समय के विवादों को सुलझाने और लोगों को अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।