AIADMK से निष्कासित पूर्व CM पन्नीरसेल्वम DMK में शामिल, तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर

0

नई दिल्ली, 27 फ़रवरी 2026 । तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ओ. पन्नीरसेल्वम, जिन्हें हाल ही में AIADMK से निष्कासित किया गया था, अब सत्तारूढ़ DMK में शामिल हो गए हैं। इस कदम को राज्य की राजनीति में बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है, जिससे आने वाले चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व AIADMK नेता ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) ने शुक्रवार को DMK का दामन थाम लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की। यह कदम अप्रैल-मई में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले उठाया गया है।

तीन बार सीएम रहे पन्नीरसेल्वम जे जयललिता के करीबी ओ.पन्नीरसेल्वम पहली बार 2001 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि 6 महीने बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 2014 में उन्होंने दूसरी बार सीएम पद का कार्यभार संभाला था। लेकिन इस बार भी वे एक महीने तक ही मुख्यमंत्री रह सके। इसके बाद वे 2016 में तीसरी बार राज्य के सीएम बने थे, लेकिन 2017 में उन्होंने एक बार फिर इस्तीफा दे दिया था।

उन्हें लेकर AIADMK के अंदर खींचतान भी चल रही थी। बताया जाता है कि पार्टी के कई नेता उनके खिलाफ थे। इसके चलते 2022 में उन्हें पार्टी से निष्काषित कर दिया गया था।

पन्नीरसेल्वम का AIADMK नेतृत्व के साथ विवाद काफी समय से चल रहा था। पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर खींचतान और संगठनात्मक फैसलों पर मतभेद के चलते उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। इसके बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।

अब DMK में उनकी एंट्री ने साफ कर दिया है कि वे सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखना चाहते हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।

DMK के लिए रणनीतिक लाभ

राज्य में पहले से मजबूत स्थिति में मौजूद DMK के लिए पन्नीरसेल्वम का शामिल होना एक रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। उनका प्रभाव विशेषकर दक्षिणी जिलों में माना जाता है, जहां वे लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। ऐसे में यह कदम सत्तारूढ़ दल के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को और मजबूत कर सकता है।

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से गठबंधनों और रणनीतिक समीकरणों के लिए जानी जाती रही है। पन्नीरसेल्वम का यह फैसला आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे विपक्षी खेमे की रणनीति में बदलाव आ सकता है।

फिलहाल, पन्नीरसेल्वम ने अपने बयान में कहा है कि वे राज्य के विकास और स्थिरता को प्राथमिकता देंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नई राजनीतिक पारी किस दिशा में जाती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.