संघर्ष से सफलता तक – एक्टर विशाल जेठवा की मां ने सैनेटरी पैड बेचकर बेटे का सपना किया पूरा

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नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 । फिल्म और टीवी जगत में अपनी पहचान बना चुके अभिनेता विशाल जेठवा की सफलता के पीछे एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी जुड़ी है। उन्होंने खुलासा किया कि उनके करियर की शुरुआत आसान नहीं थी, और उनकी मां ने परिवार को संभालने और उनके सपनों को जिंदा रखने के लिए सड़कों पर सैनेटरी पैड बेचने तक का काम किया। यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि एक मां के त्याग, हिम्मत और अटूट विश्वास की है।

एक्टर विशाल जेठवा की नीरज घायवान के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘होमबाउंड’ भले ही ऑस्कर की रेस से बाहर हो गई हो। लेकिन इस फिल्म ने विशाल को इंटरनेशनल स्टार बना दिया। कान्स फिल्म फेस्टिवल सहित इस फिल्म की कई प्रमुख इंटरनेशनल फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई। जहां पर फिल्म को खूब सराहा गया।

इस फिल्म के जरिए विशाल जेठवा भले ही ग्लोबल मंच पर छा गए हों, लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी जर्नी इतनी भी आसान नहीं थी। एक्टर का बचपन बहुत ही गरीबी में मुंबई की चॉल में बीता। उनके पिता नरेश जेठवा नारियल पानी बेचते थे। विशाल जब 13 साल के थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई।

विशाल जेठवा की मां प्रीति जेठवा ने परिवार का पेट पालने के लिए घरों में सफाई का काम किया, यहां तक कि सैनिटरी पैड्स बेचे। लेकिन बेटे के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। मां के ही सपोर्ट से विशाल एक्टर बने। शुरुआत में उन्हें काफी रिजेक्शन का समाना करना पड़ा, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी।

आज जब विशाल इंडस्ट्री में पहचान बना चुके हैं, तो वे अपनी मां के संघर्ष को अपनी असली पूंजी मानते हैं। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह भी याद दिलाती है कि सफलता के पीछे अक्सर परिवार का अदृश्य संघर्ष छिपा होता है।

यह कथा समाज में काम की गरिमा (dignity of labour) और माता-पिता के त्याग का उदाहरण है। विशाल की उपलब्धियां उनकी प्रतिभा का परिणाम हैं, लेकिन उनकी मां का साहस और समर्पण उस सफलता की नींव है।

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