SIR विवाद पर ममता बनर्जी का बड़ा बयान—‘चिंता के माहौल में बंगाल में रोज़ 4 आत्महत्याएं’

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कोलकाता, 24 जनवरी 2026 । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर गहरी चिंता जताते हुए दावा किया है कि राज्य में बने तनावपूर्ण माहौल का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़ी आशंकाओं और अफवाहों के कारण आम नागरिकों, खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है, जिसके चलते कथित तौर पर रोज़ाना आत्महत्या जैसे गंभीर मामले सामने आ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि बंगाल में SIR की चिंता में हर रोज 3 से 4 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। अब तक 110 से ज्यादा लोग मर चुके हैं।

40-45 लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इतने साल बाद क्या हमें यह साबित करना पड़ेगा कि हम इस देश के नागरिक हैं?

ममता बनर्जी ने कोलकाता के रेड रोड पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के कार्यक्रम में ये बातें कही।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया ने कई लोगों में यह डर पैदा कर दिया है कि उनके दस्तावेज़ों, पहचान और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर अनिश्चितता पैदा हो सकती है। उनका कहना है कि इस तरह का वातावरण सामाजिक अस्थिरता को जन्म देता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया को लागू करते समय जनता के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रही है कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं और किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता अभियान और स्थानीय अधिकारियों के जरिए लोगों से संवाद बढ़ाने की बात भी कही गई है, ताकि भ्रम और भय का माहौल कम किया जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक विषय बन चुका है। विपक्षी दल जहां इसे मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा का प्रश्न बता रहे हैं, वहीं समर्थक इसे चुनावी और राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा मानते हैं।

इस बयान ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा विधानसभा और लोकसभा चुनावों के संदर्भ में भी प्रमुख बहस का विषय बन सकता है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या प्रशासन और सरकार मिलकर ऐसा वातावरण बना पाएंगे जिससे लोगों के मन से डर दूर हो और सामाजिक स्थिरता बनी रहे।

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