बीजिंग, 02 जनवरी 2026 । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर एक बार फिर सख्त रुख दोहराते हुए कहा है कि चीन और ताइवान का एक होना तय है और इसे कोई ताकत नहीं रोक सकती। उनके इस बयान को बीजिंग की दीर्घकालिक नीति की पुनः पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन साथ ही इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया है।
चीन और ताइवान के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के भाषण में कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और दोनों के बीच खून का रिश्ता है।
उन्होंने कहा कि चीन और ताइवान का एक होना समय की मांग है और इसे कोई रोक नहीं सकता। ताइवान की सरकार ने इसे बहुत उकसाने वाला कदम बताया और कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अशांति फैल सकती है।
चीन हमेशा से कहता आया है कि ताइवान उसका हिस्सा है और जरूरत पड़ी तो सेना के दम पर उसे अपने साथ मिला लेगा। वहीं अमेरिका ने भी चीन की इस हरकत की आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन की बातें बेवजह तनाव बढ़ा रही हैं।
अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराते हुए विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका ताइवान जलडमरूमध्य (ताइवान और चीन के बीच का समुद्री क्षेत्र) में मौजूदा शांति को भंग करने के किसी भी कदम का विरोध करता है।
चीन का दावा है कि ताइवान ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से उसका हिस्सा रहा है, जबकि ताइवान खुद को एक अलग, लोकतांत्रिक प्रशासन के रूप में प्रस्तुत करता है। ताइवान की सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि उसका भविष्य वहां की जनता तय करेगी, न कि किसी बाहरी दबाव से। जिनपिंग के बयान के बाद ताइवान की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बयान को लेकर चिंता जताई जा रही है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ताइवान की सुरक्षा और यथास्थिति बनाए रखने की बात करते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चीन-ताइवान मुद्दा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन से भी जुड़ा है, जहां किसी भी बड़े कदम का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सुरक्षा और कूटनीति पर पड़ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, जिनपिंग का यह बयान घरेलू राजनीति, राष्ट्रवाद और चीन की दीर्घकालिक रणनीति से भी जुड़ा हुआ है। यह संदेश चीन के भीतर मजबूती दिखाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह संकेत देता है कि ताइवान का मुद्दा बीजिंग के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।