बंगाल में मोदी का तीखा हमला, बोले– यहां कमीशनखोरी वाली सरकार, विकास परियोजनाएं जानबूझकर रोकी गईं

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नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2025 । पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल में “कमीशनखोरी वाली सरकार” काम कर रही है, जिसके चलते केंद्र की कई अहम विकास परियोजनाएं वर्षों से अटकी पड़ी हैं। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक स्वार्थ के कारण राज्य का विकास प्रभावित हो रहा है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोलकाता एयरपोर्ट से नादिया जिले के राणाघाट में आयोजित कार्यक्रम को फोन से वर्चुअली संबोधित किया। मोदी ने कहा- ऐसा नहीं है कि बंगाल के विकास के लिए पैसों की कमी है, लेकिन यहां की सरकार सिर्फ कमीशनखोरी में लगी रहती है।

PM ने कहा- आज भी बंगाल में हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। मैं बंगाल की जनता के सामने अपनी पीड़ा रखना चाहता हूं। TMC को मोदी का विरोध करना है तो करे, 100 बार करे, हजार बार करे। लेकिन मैं ये नहीं समझ पा रहा हूं कि बंगाल के विकास को क्यों रोका जा रहा है।

PM ने अपने संबोधन से पहले ₹3,200 करोड़ के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन भी किया। PM सुबह करीब 10.40 बजे दिल्ली से कोलकाता पहुंचे थे। वहां से हेलिकॉप्टर से ताहिरपुर रवाना हुए। हालांकि, घने कोहरे के कारण हेलिकॉप्टर कुछ देर तक हेलीपैड के ऊपर मंडराने के बाद वापस कोलकाता लौट गया।

बंगाल में वोटर्स लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) ड्राफ्ट जारी होने के बाद मोदी का यह पहला और पिछले पांच महीनों में तीसरा दौरा है। प्रधानमंत्री बंगाल के बाद आज शाम दो दिनों के लिए असम दौरे पर जाएंगे। असम में ​₹​​​​​15,600 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन-शिलान्यास करेंगे।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती है और राज्य को ऐसी सरकार की जरूरत है जो पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करे। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियों का मकसद गरीब, किसान, युवा और महिलाओं को सशक्त बनाना है, लेकिन राज्य सरकार की नीयत के कारण इन योजनाओं का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति और गरमा गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बनने की संभावना जताई जा रही है, जहां विकास बनाम भ्रष्टाचार की राजनीति एक बार फिर आमने-सामने नजर आ सकती है।

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