सड़क हादसों पर सरकार की बड़ी चिंता

हर साल 5 लाख दुर्घटनाओं में 1.8 लाख मौतें, 10 मिनट में एंबुलेंस पहुंचाने की योजना तैयार

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नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2025 । देश में सड़क हादसों से होने वाली मौतों के बढ़ते आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने संसद में जानकारी दी कि हर साल देश में करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है। इन आंकड़ों को गंभीर बताते हुए सरकार ने सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई योजना लाने की घोषणा की है।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें औसतन 1.8 लाख लोगों की जान जाती है। इनमें से 66% मौतें युवाओं (18 से 34 साल) की होती हैं।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के सवाल पर गडकरी ने स्वीकार किया कि रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने और कानून सख्त करने के बावजूद सरकार मौतों की संख्या घटाने में पूरी तरह सफल नहीं हुई है।

गडकरी ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों को आधुनिक एंबुलेंस देने की योजना बना रही है। इसके तहत एंबुलेंस हादसे की जगह पर 10 मिनट के भीतर पहुंचेगी।

उन्होंने IIM की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि अगर घायलों को समय पर इलाज मिल जाए तो 50 हजार जिंदगियां बच सकती हैं।

इस प्रस्तावित योजना के तहत नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे और अधिक दुर्घटना संभावित इलाकों में एंबुलेंस की रणनीतिक तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही अत्याधुनिक कंट्रोल रूम, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और स्थानीय अस्पतालों से बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक इलाज शुरू किया जा सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल चिकित्सा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन, ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण, नशे में गाड़ी चलाने पर कड़ी कार्रवाई और सड़क इंजीनियरिंग में सुधार जैसे कदम भी इस रणनीति का हिस्सा होंगे। इसके अलावा आम नागरिकों को बेसिक फर्स्ट एड की ट्रेनिंग देने पर भी विचार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 10 मिनट में एंबुलेंस पहुंचाने की योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या में बड़ी कमी लाई जा सकती है। यह पहल न केवल जीवन रक्षक साबित होगी, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक नई दिशा भी तय करेगी।

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