करूर भगदड़ में CBI जांच के आदेश — न्याय, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2025 । तमिलनाडु के करूर जिले में हुई भीषण भगदड़ में कई लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने अब इस घटना की CBI जांच के आदेश दिए हैं। इस कदम ने न केवल पीड़ित परिवारों में न्याय की उम्मीद जगाई है, बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर नई बहस को जन्म दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को करूर भगदड़ मामले में CBI जांच के आदेश दिए। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एक्टर विजय की पार्टी TVK और भाजपा नेता उमा आनंदन की मामले की CBI जांच याचिका पर फैसला सुनाया। मद्रास HC ने मामले की जांच SIT को सौंपी थी।

बेंच ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय कमेटी जांच की निगरानी करेगी। इसमें दो IPS अधिकारी (तमिलनाडु कैडर के हो, लेकिन यहां के मूल निवास नहीं) इसमें शामिल होंगे, जो IGP रैंक से नीचे के नहीं होने चाहिए।

बेंच ने 10 अक्टूबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा था कि जब AIADMK को करूर में कम जगह होने के कारण रैली की अनुमति नहीं दी गई तो फिर TVK को 27 सितंबर की रैली को कैसे इजाजत दी गई।

कोर्ट ने यह भी पूछा था कि मद्रास हाईकोर्ट ने SIT जांच का आदेश कैसे दिया, जबकि मामला मदुरै बेंच में था। दरअसल, 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर में एक्टर विजय की रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी। 100 से ज्यादा लोग घायल थे।

आदेश में क्या कहा गया…

  • CBI के अधिकारियों से अपील है कि वे कमेटी के समक्ष जांच की मंथली रिपोर्ट पेश करें। SOP की सुनवाई बेंच को सौंपी जाएगी। हमने रजिस्ट्रार जनरल से रिपोर्ट मांगी है कि इसे आपराधिक याचिका के तौर पर कैसे लिस्ट किया गया।
  • मद्रास HC में सिंगल जस्टिस ने चीफ जस्टिस की परमिशन के बिना याचिका पर विचार किया, जो सही नहीं माना गया। उन्होंने मदुरै बेंच के पहले के फैसले को नजरअंदाज करके मामला उठाया, जबकि उसी विषय पर मदुरै बेंच की डिवीजन बेंच पहले से ही जानकारी में थी। ऐसा करना यह दर्शाता है कि मामले को संवेदनशील और सही तरीके से संभालने में कमी रही। इसके कारण अलग-अलग कोर्ट में मामला चलने लगा। यह चिंता की बात है कि SOP से जुड़ी रिट याचिका WP क्रिमिनल में कैसे आ सकती है। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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