पाक बॉर्डर पर राजस्थान-पंजाब में बनेंगी 2,280 KM लंबी सड़कें

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नई दिल्ली,12 अक्टूबर। चीन से सटे ईस्टर्न फ्रंट पर इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की तैयारियों के बीच मोदी सरकार वेस्टर्न फ्रंट को मजबूत करने में जुटी है। पाकिस्तान से सटी सीमा पर तारबंदी के पास और इसे जोड़ने के लिए लिंक सड़कों का जाल बिछाया जाएगा।

राजस्थान और पंजाब से सटे बॉर्डर इलाके में 2,280 किमी लंबी सड़कें बनाने के लिए 4,406 करोड़ रुपए की लागत आएगी। PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दी है।

सड़कों का जाल बिछाने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने 2021 में ये प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने इसे मंजूर किया था। फंड के लिए लंबे समय से कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार था। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद बॉर्डर तक सेना 48 घंटे से भी कम समय में पहुंच सकेगी।

चीन के सीपेक का जवाब होगा यह सड़क नेटवर्क पाकिस्तान में चीन के इकॉनोमी प्रोजेक्ट ‘सीपेक’ के जवाब में भारत ने वेस्टर्न फ्रंट यानी पश्चिमी सीमा पर तीन लेयर सड़कों का जाल बिछा दिया है। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बॉर्डर से 40 से 50 किमी दूर 1,491 किमी लंबी टू लेन सड़क और अमृतसर-जामनगर 1,254 किमी लंबे इकॉनोमी एक्सप्रेस-वे का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।

भारतमाला और एक्सप्रेस-वे को जोड़ने की भी तैयारी भारतमाला और एक्सप्रेस-वे को आपस में कनेक्ट करने के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) 5 साल के अंदर 877.442 किमी लंबी सिंगल सड़कें बॉर्डर के पास बनाएगा। ये सड़कें सीधे बॉर्डर के पास नई निर्माण होने वाली सड़कों से जुड़ेंगी। इससे बीएसएफ और सेना के अलावा बॉर्डर के आसपास रहने वालों के लिए आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा।

बॉर्डर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 690 किमी लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। ये सड़कें सीधे बॉर्डर के पास स्थित भारतमाला और बीआरओ की सड़कों के नेटवर्क को आपस में जोड़ेंगी।

गुजरात से सटे हुए बॉर्डर पर राज्य सरकार ने 200 किमी रोड बनाई गुजरात से सटे बॉर्डर पर 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़क राज्य सरकार ने पहले ही बनाकर दी थी। गुजरात से सटी 508 किमी लंबी सीमा में से 262 किमी सीमा तो दलदली है। वहीं, बॉर्डर से सटी करीब 200 किमी सड़क का निर्माण नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम रहते बनाई गई थी। बॉर्डर पर सड़क नेटवर्क के अलावा बिजली और पानी का नेटवर्क भी मजबूत किया गया था। इसके चलते ही वहां विंड और सोलर पैनल लगाने में मदद मिली। इससे बॉर्डर टूरिज्म भी बढ़ा।

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