पटना, 30 अक्टूबर 2026 | बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर अपने राजनीतिक कौशल से सबको चौंका दिया है। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हुए चुनाव में RJD ने दो सीटों पर जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका दिया है। खास बात यह है कि लालू यादव ने इस बार अपनी पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) राजनीति के साथ सवर्ण वोट बैंक को जोड़ने की रणनीति अपनाई। इसका असर पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजों में दिखाई दिया।
इस चुनाव के नतीजों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और BJP के रणनीतिकारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खासकर उन सीटों पर RJD की जीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां BJP का मजबूत प्रभाव रहा है।
क्या था लालू यादव का समीकरण!
वैसी एमएलसी चुनाव के बहुत पहले राजद के ‘युवराज’ तेजस्वी यादव ने M Y समीकरण से हट कर ए टू जेड ( A टू Z) की थ्योरी ला कर एक नई राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार की। पर इस एमएलसी के चुनाव में राजद सुप्रीमो लालू यादव ने एनडीए के खास समीकरण भूमिहार और ब्राह्मण में दल की संभावना तलाश की। उनका मानना था कि राष्ट्रीय जनता दल के प्रति M Y का विश्वास आज भी बना हुआ है।
लालू यादव ने बदला चुनावी समीकरण, A टू Z राजनीति पर फोकस
RJD नेता तेजस्वी यादव पहले ही पार्टी की राजनीति को मुस्लिम-यादव समीकरण से आगे बढ़ाकर A टू Z की रणनीति देने की बात कह चुके हैं। अब लालू यादव ने इस रणनीति को चुनावी स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
इस बार पार्टी ने भूमिहार और ब्राह्मण समुदाय के उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर सवर्ण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की। इसके साथ ही पार्टी ने अपने पारंपरिक मुस्लिम और यादव वोट बैंक को भी एकजुट रखने पर जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, यही सामाजिक समीकरण RJD के लिए फायदेमंद साबित हुआ और पार्टी शून्य से दो MLC सीटों तक पहुंच गई।
पटना शिक्षक सीट पर 30 साल पुराना BJP का किला ढहा
BJP के लिए सबसे बड़ा झटका पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगा। यहां पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. नवल किशोर यादव करीब 30 वर्षों से इस सीट पर जीत दर्ज करते आ रहे थे।
इस बार RJD ने भूमिहार समुदाय से आने वाले डॉ. संजीव कुमार को उम्मीदवार बनाया। डॉ. संजीव कुमार पहले JDU से जुड़े रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने RJD का दामन थाम लिया।
लालू यादव की रणनीति मुस्लिम, यादव और भूमिहार मतदाताओं के बीच चुनावी तालमेल बनाने की थी। चुनाव परिणाम में डॉ. संजीव कुमार ने जीत दर्ज कर BJP के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व को समाप्त कर दिया।
दरभंगा स्नातक सीट पर दूसरी वरीयता ने पलटा खेल
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम भी काफी दिलचस्प रहा। शुरुआती मतगणना के बाद BJP के सर्वेश कुमार की जीत की चर्चा होने लगी थी। हालांकि, दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद परिणाम बदल गया।
अंतिम नतीजे में RJD के अनिल कुमार झा ने जीत हासिल की। इस सीट पर पार्टी ने ब्राह्मण, मुस्लिम और यादव मतदाताओं के बीच समीकरण बनाने की कोशिश की थी।
इस जीत ने RJD को दोहरी सफलता दिलाई और BJP के लिए राजनीतिक चिंता बढ़ा दी।
सम्राट चौधरी के सामने क्यों बढ़ी चुनौती?
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में BJP अपनी सामाजिक और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की राजनीति में गैर-यादव पिछड़े वर्गों के साथ सवर्ण मतदाताओं का समर्थन भी महत्वपूर्ण रहा है।
ऐसे में RJD की ओर से भूमिहार और ब्राह्मण समुदाय के उम्मीदवारों को आगे बढ़ाना BJP के पारंपरिक सामाजिक आधार के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को पूरे बिहार के मतदाताओं का रुझान नहीं माना जा सकता। इन निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं।
क्या RJD की नई रणनीति 2029 और 2030 में भी दिखाएगी असर?
बिहार की राजनीति में इन नतीजों का महत्व आने वाले लोकसभा चुनाव 2029 और विधानसभा चुनाव 2030 के लिहाज से भी देखा जा रहा है।
यदि RJD अपने MY समीकरण के साथ सवर्ण और दूसरे सामाजिक वर्गों में भी समर्थन बढ़ाने में सफल रहती है, तो राज्य की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में नए समीकरण बन सकते हैं।
दूसरी ओर, BJP के सामने अपने पारंपरिक समर्थक वर्गों के साथ दूसरे सामाजिक समूहों का भरोसा बनाए रखने की चुनौती होगी।
फिलहाल विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने यह संकेत जरूर दिया है कि बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों के साथ उम्मीदवारों की सामाजिक पहचान और स्थानीय समर्थन भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। लालू यादव की रणनीति ने RJD को दो सीटों पर जीत दिलाई है, लेकिन इसका व्यापक चुनावी असर आने वाले चुनावों में ही स्पष्ट होगा।