चंडीगढ़,पंजाब, 24 अक्टूबर 2026| पंजाब विधानसभा ने 23 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मतदाता सूचियों से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच कराने की मांग की गई।
विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, निर्वाचन संस्थाओं की जवाबदेही और पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई गई।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और इस प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने SIR को समाप्त करने की मांग भी उठाई। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रस्ताव में कहा गया कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है। इसलिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन करने की प्रक्रिया निष्पक्ष तथा पारदर्शी होनी चाहिए। इसमें यह भी मांग की गई कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक उल्लंघन के ठोस सबूत मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सदन ने प्रस्ताव की प्रति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजने की मांग भी की। इस घटनाक्रम के बाद SIR और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वतंत्र जांच और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।