लखनऊ शिवा शर्मा हत्याकांड में नया मोड़, तीनों आरोपियों की जमानत खारिज; सीन रीक्रिएशन की तैयारी

श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश को अदालत से राहत नहीं मिली। पुलिस अब शिवा शर्मा की मौत की परिस्थितियों और कथित मददगारों की भूमिका की जांच में जुटी है।

0

लखनऊ, उत्तर प्रदेश, 24 अक्टूबर 2026|: कारोबारी और कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। 24 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में आरोपी श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश को अदालत से राहत नहीं मिली है। 23 अक्टूबर को तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं। अदालत ने मामले की गंभीरता और सुनवाई से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार किया।

शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में प्राग नारायण रोड स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआत में घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। इसके बाद शिवा की मां की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। परिवार ने शिवा के साथ मारपीट कर उसे नीचे गिराए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं आया है।

जांच के दौरान पुलिस ने श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली को 20 अक्टूबर को नागपुर से गिरफ्तार किया था। तीनों को लखनऊ लाकर पूछताछ की गई और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच भी शुरू की है।

इस बीच, पुलिस की जांच कथित तौर पर आरोपियों को फरार होने में मदद करने वाले लोगों तक भी पहुंची है। कुछ रिपोर्टों में दो व्यक्तियों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनकी भूमिका और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस 9 अक्टूबर की घटना का सीन रीक्रिएशन करने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए घटनास्थल की परिस्थितियों, गिरने की संभावित दिशा और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान किया जा सकता है।

अब इस मामले में आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही अहम होगी। पुलिस की जांच से सामने आने वाले तथ्य ही स्पष्ट करेंगे कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था और इसमें किसकी क्या भूमिका थी। तब तक सभी आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध माना जाना उचित नहीं होगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.