देहरादून में अनोखी शादी: दुल्हन ढाई घंटे पैदल चलकर बारात लेकर पहुंची दूल्हे के घर

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देहरादून, 22 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के देहरादून जिले से एक अनोखी शादी की खबर सामने आई है। यहां दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची। पहाड़ी क्षेत्र में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण दुल्हन और बारातियों को दुर्गम रास्तों पर करीब ढाई घंटे पैदल चलना पड़ा। इस अनोखी शादी की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि इसमें पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दुल्हन ने बारात लेकर जाने की पहल की।

पहाड़ी इलाकों में सड़क और परिवहन की सुविधा की कमी आज भी कई परिवारों के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में यह शादी स्थानीय लोगों के लिए एक यादगार घटना बन गई। दुल्हन का दूल्हे के घर बारात लेकर पहुंचना सामाजिक परंपराओं से अलग एक अनोखा उदाहरण भी माना जा रहा है।

इसी पंरपरा को निभाने के लिए दुल्हन अपनी बारात लेकर पैदल निकल पड़ी। दुल्हन ने बताया कि वह करीब ढ़ाई घंटे पैदल चली। तब जाकर दुल्हे के घर पहुंची। दुल्हन ने सरकार से जल्द सड़क की मांग पूरा करने की अपील की है।

दोनों गांव के बीच सड़क मार्ग नहीं

बताया जा रहा है कि बारात बीते मंगलवार को हुई। उदावा गांव के अनिल चौहान का विवाह बुल्हाड़ गांव की शर्मीला से तय हुआ था। मंगलवार को दुल्हन बरात के साथ वाहन से लोखंडी तक पहुंची। इसके बाद उदावा गांव तक सड़क नहीं होने के कारण उसे पैदल पहाड़ी रास्ते से सफर तय करना पड़ा। बारात बुल्हाड़ गांव से उदावा गांव जानी थी। जो कि करीब 18 किमी दूर है। दोनों गांव के बीच सड़क मार्ग नहीं है।

परंपरा को निभाने के लिए दुल्हन शर्मिला को लोखंडी से करीब 10 किमी का सफर पैदल तय करना । सड़क सुविधा नहीं होने के कारण दुल्हन करीब ढ़ाई घंटे पैदल चलकर बरात लेकर उदावा गांव पहुंची। बीच में दुल्हन दौड़ती हुई भी नजर आई। दुल्हन के पीछे सारे रिश्तेदार और परिजन भी पैदल चलते दिखे। जिसका लोगों ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

सड़क नहीं होने से पहाड़ी रास्तों पर चला बाराती काफिला

जानकारी के मुताबिक, दूल्हे के घर तक सड़क नहीं होने के कारण बारात वाहन से सीधे वहां नहीं पहुंच सकी। इसके बाद दुल्हन और बारातियों ने पैदल ही पहाड़ी रास्ते से आगे बढ़ने का फैसला किया। रास्ता दुर्गम होने के कारण इस सफर में करीब ढाई घंटे लगे।

पहाड़ी क्षेत्रों में कई गांव ऐसे हैं, जहां सड़क संपर्क का अभाव लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है। शादी-विवाह जैसे आयोजनों में भी लोगों को पैदल रास्तों से गुजरना पड़ता है। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ों में बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत को चर्चा में ला दिया है।

दुल्हन की बारात ने सड़क सुविधा की कमी को किया उजागर

यह शादी चकराता क्षेत्र की उस चुनौती को भी सामने लाती है, जिसका सामना कई पहाड़ी गांवों के लोग करते हैं। सड़क संपर्क न होने से ग्रामीणों को आवागमन के लिए दुर्गम पगडंडियों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसका असर केवल शादी-विवाह पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन मदद और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ सकता है।

अमर उजाला की 21 अक्टूबर की रिपोर्ट में देहरादून जिले के उदांवा गांव में सड़क और मोबाइल नेटवर्क की कमी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं।

आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचता है, लेकिन इस शादी में दुल्हन ने खुद बारात लेकर दूल्हे के घर जाने की पहल की। पहाड़ी रास्तों पर ढाई घंटे का पैदल सफर इस आयोजन को और खास बना गया।

इस घटना ने एक तरफ लोगों का ध्यान उत्तराखंड की अनोखी शादियों की ओर खींचा है, तो दूसरी तरफ पहाड़ी गांवों तक सड़क पहुंचाने की जरूरत पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के लिए उम्मीद यही है कि ऐसी घटनाओं के बाद बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होगी।

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