बांकीपुर में प्रशांत किशोर पर सवाल उठाने वाले रामकृपाल यादव फिर चर्चा में

MLC चुनाव से पहले बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

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पटना ,21 अक्टूबर 2026 | बिहार की राजनीति में भाजपा नेता और राज्य सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव का प्रशांत किशोर को लेकर दिया गया पुराना बयान एक बार फिर चर्चा में है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के स्थानीय जुड़ाव पर सवाल उठाते हुए पूछा था, “कौन हैं प्रशांत किशोर?” अब बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव से पहले उनके बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इस बीच बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत ने उस पुराने बयान को नए सियासी संदर्भ में ला दिया है।

प्रशांत किशोर को लकर रामकृपाल का अटपटा बयान

पटना में मंत्री रामकृपाल यादव से कुछ पत्रकारों ने एमएलसी चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी के प्रत्याशियों को लेकर सवाल पूछा। तब, रामकृपाल यादव ने कहा,’कौन हैं प्रशांत किशोर? वो वहीं जो चुनाव में हार गए।’ इसके बाद पत्रकारों ने उनको याद दिलाया की बांकीपुर से आपकी पार्टी को हरा दिए थे और वो जीत गए थे। किसी तरह आनन-फानन में रामकृपाल यादव ने खुद को संभाला। फिर उन्होंने कहा, ‘हां तो उनका पार्टी सब?’ पत्रकारों से ही पूछ लिया, ‘प्रशांत किशोर का कोई उम्मीदवार है क्या कोई? दिए हुए हैं…अच्छा, अच्छा। इसीलिए तो बोल रहे हैं कि उनके उम्मीदवार को तो कोई जानता भी नहीं है।’

बांकीपुर उपचुनाव में क्या बोले थे रामकृपाल यादव?

30 जुलाई 2026 को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान मतदान करने के बाद रामकृपाल यादव ने प्रशांत किशोर की स्थानीय पहचान पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि प्रशांत किशोर बांकीपुर के किस मोहल्ले में रहते हैं और क्या उन्हें क्षेत्र की पांच गलियों के नाम भी पता हैं।

रामकृपाल यादव ने यह भी कहा था कि मतदाता ऐसे उम्मीदवार को प्राथमिकता देते हैं, जो क्षेत्र के लोगों के बीच रहता हो और उनके सुख-दुख में शामिल होता हो। उस समय उन्होंने भाजपा और एनडीए उम्मीदवार की जीत का दावा भी किया था।

नतीजों ने बदल दिया राजनीतिक संदर्भ

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत के बाद रामकृपाल यादव का पुराना बयान फिर चर्चा में आया। जिस नेता की स्थानीय पहचान पर सवाल उठाए गए थे, वही अब विधानसभा पहुंच चुके हैं।

इसके बाद प्रशांत किशोर को पटना में सरकारी विधायक आवास आवंटित हुआ, जो रामकृपाल यादव के आवास के पास बताया गया। इस पर रामकृपाल यादव ने कहा कि प्रशांत किशोर अब उनके विधायक और पड़ोसी हैं।

MLC चुनाव से पहले बिहार में क्यों बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी?

बिहार में 23 अक्टूबर 2026 को होने वाले विधान परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। खास तौर पर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार और पार्टी के ही एक बागी नेता के बीच मुकाबले ने ध्यान खींचा है। इस अंदरूनी खींचतान को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति और संभावित असर पर चर्चा हो रही है।

प्रशांत किशोर ने भी MLC चुनाव के संदर्भ में बयान दिया है कि वह मतदाताओं से घर-घर जाकर वोट नहीं मांगेंगे। उन्होंने लोगों से अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसला लेने की अपील की। उनके इस बयान को बिहार की राजनीति में जवाबदेही और चुनावी मुद्दों पर केंद्रित संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

रामकृपाल यादव के पुराने बयान और बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों को जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव से पहले उन्होंने प्रशांत किशोर के स्थानीय जुड़ाव पर सवाल उठाए थे, जबकि परिणाम में जन सुराज के संस्थापक ने जीत हासिल की। यही वजह है कि MLC चुनाव के माहौल में उनका नाम फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

हालांकि, किसी एक उपचुनाव के परिणाम से पूरे बिहार की राजनीतिक तस्वीर तय नहीं होती। MLC चुनाव का स्वरूप भी विधानसभा चुनाव से अलग है, इसलिए दोनों के नतीजों और राजनीतिक समीकरणों का आकलन अलग-अलग आधार पर करना जरूरी है।

बिहार में विधानसभा और विधान परिषद की राजनीति के बीच कई मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं—जदयू के भीतर मतभेद, भाजपा-जदयू गठबंधन का समीकरण और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की भूमिका। ऐसे में नेताओं के बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर रहे हैं।

फिलहाल रामकृपाल यादव के पुराने बयान को बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के संदर्भ में याद किया जा रहा है। वहीं, MLC चुनाव के नतीजे यह बताएंगे कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं और प्रतिनिधियों का रुख किस दिशा में जाता है।

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