हवाई किराए पर सरकार का नया रुख, इमरजेंसी में लगेगी सीमा!

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नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026 | हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए टिकटों के किराए से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस के टिकट किराए को सीधे नियंत्रित करने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, प्राकृतिक आपदा या दूसरी असाधारण परिस्थितियों में यदि किराए अचानक बहुत बढ़ते हैं, तो सरकार उन्हें नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है। नई एयरफेयर व्यवस्था का उद्देश्य एयरलाइंस को सामान्य कारोबारी स्वतंत्रता देना और जरूरत पड़ने पर यात्रियों को मनमाने किराए से राहत दिलाना है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियमों के तहत एयरलाइंस के किराए को सीधे कंट्रोल नहीं किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइंस मांग और उपलब्ध सीटों के हिसाब से किराया तय कर सकेंगी। हालांकि, किसी इमरजेंसी में सरकार के पास किराया तय करने का अधिकार होगा, ताकि यात्रियों को ज्यादा पैसे न देने पड़ें।

नए नियमों के तहत, एयरलाइंस को फ्लाइट के किराए की जानकारी एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देनी होगी। उसे यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी दिखानी होगी। DGCA निगरानी करेगा कि कोई भी एयरलाइन तय सीमा से ज्यादा किराया न वसूले।

इससे पहले केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि एयरलाइंस के मनमाने किराए को रोकने के लिए दो हफ्ते में नए नियम लागू किए जाएंगे। कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में त्योहारों और छुट्टियों में महंगे टिकटों और छिपे हुए शुल्कों पर रोक लगाने की मांग की गई है।

आपात स्थिति में सरकार कर सकेगी हस्तक्षेप

प्रस्तावित नियमों के तहत प्राकृतिक आपदा या किसी बड़े संकट के दौरान यदि किसी खास रूट पर अचानक यात्रियों की मांग बढ़ती है और किराए में असामान्य उछाल आता है, तो सरकार सीमित अवधि के लिए किराए की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी। इसका मकसद संकट के समय लोगों को अत्यधिक महंगे टिकट खरीदने की मजबूरी से बचाना है।

उदाहरण के तौर पर, किसी आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों को किसी शहर से बाहर निकलना हो, तो उस रूट पर टिकटों के दाम अचानक बढ़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। हालांकि, यह कदम असाधारण परिस्थितियों के लिए होगा, सामान्य बाजार व्यवस्था के लिए नहीं।

DGCA की निगरानी में पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी

नई व्यवस्था में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, एयरलाइंस को अलग-अलग रूट के किराए की श्रेणियां नियामक को देनी होंगी और अपनी वेबसाइट पर किराए की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। निगरानी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां जमा की गई अधिकतम किराया श्रेणी से ज्यादा शुल्क न वसूलें।

किराए के विवरण में बेस फेयर, टैक्स, सरचार्ज और एयरपोर्ट से जुड़े शुल्क जैसी मदों की जानकारी भी शामिल करने की तैयारी है। इससे यात्रियों को टिकट की कुल कीमत समझने और अलग-अलग एयरलाइंस के किराए की तुलना करने में मदद मिल सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला

हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। 17 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र ने अदालत को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है और उन्हें जल्द प्रकाशित किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से अंतिम नियम 16 नवंबर तक पेश करने को कहा है।

यह मामला त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के महंगे होने तथा किराया तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग से जुड़ा है। ऐसे में सरकार की नई व्यवस्था पर यात्रियों, एयरलाइंस और विमानन क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

नई व्यवस्था लागू होने पर यात्रियों को सामान्य दिनों में टिकटों के किराए में तत्काल सरकारी कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। एयरलाइंस बाजार की परिस्थितियों के आधार पर कीमतें तय करती रहेंगी, लेकिन किराए की घोषित श्रेणियों की निगरानी और असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

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