नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026 | दिल्ली में इस बार दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। पीतमपुरा स्थित श्री केशव रामलीला समिति ने यह अनोखी पहल की है। आयोजकों का कहना है कि कॉकरोच को गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक मानते हुए इसके जरिए लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा। विजयादशमी के मौके पर होने वाला यह आयोजन अपनी अलग थीम के कारण चर्चा में है।
देशभर में आज दशहरा मनाया जाएगा। इंदौर में 111 फीट, कोटा और भोपाल में 105-105 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। रायपुर और उज्जैन में 101-101 फीट के पुतले जलाए जाएंगे। दिल्ली में रावण के साथ 30 फीट ऊंचा कॉकरोच भी जलेगा।
देश में रावण दहन की परंपरा 200 साल से भी पुरानी है। मान्यता है कि 17वीं शताब्दी में तुलसीदास के शिष्य मेघा भगत ने वाराणसी में रामलीला शुरू की थी। हालांकि, ऐतिहासिक प्रमाण 1834 के ब्रिटिश कलाकार जेम्स प्रिन्सेप के एक चित्र में मिलता है।
इसमें रामनगर में बनारस के राजा के सामने रामलीला का आयोजन और रावण दहन को दिखाया गया है। यह चित्र लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में मौजूद है।
रावण के साथ क्यों जलेगा कॉकरोच का पुतला?
श्री केशव रामलीला समिति के मुताबिक, दशहरे पर कॉकरोच का पुतला जलाने का उद्देश्य समाज में फैली गंदगी और अस्वच्छता के खिलाफ संदेश देना है। समिति इसे स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियान से जोड़कर देख रही है। आयोजकों का कहना है कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस परंपरा के जरिए सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी जागरूकता फैलाई जा सकती है।
समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने कहा कि इस पहल का मकसद किसी राजनीतिक दल या संगठन को निशाना बनाना नहीं, बल्कि लोगों को सफाई के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उनके अनुसार, कॉकरोच का पुतला घरों, आसपास के इलाकों और समाज से गंदगी दूर करने का प्रतीक है।
30 फीट ऊंचा होगा कॉकरोच का पुतला
पीतमपुरा में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में कॉकरोच का पुतला करीब 30 फीट ऊंचा बनाया गया है। इसे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ रखा जाएगा। रामलीला समिति का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा, लेकिन कॉकरोच के पुतले के जरिए स्वच्छता को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है।
दिल्ली में कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से जुड़ा एक समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। यह समूह मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉकरोच के पुतले को लेकर सवाल खड़े किए हैं और इसे राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा है।
हालांकि, आयोजकों ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि पुतला किसी राजनीतिक आंदोलन या संगठन के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य केवल गंदगी और अस्वच्छता के खिलाफ जागरूकता फैलाना है। इसलिए इस पहल को लेकर सामने आ रही राजनीतिक व्याख्याओं और आयोजकों के आधिकारिक बयान को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पहले भी सामाजिक बुराइयों पर आधारित पुतले जला चुकी है समिति
समिति के अध्यक्ष के अनुसार, रामलीला के दौरान पहले भी सामाजिक समस्याओं को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने वाले पुतले जलाए गए हैं। पिछले वर्षों में नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी बुराइयों को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया था। इस बार गंदगी और अस्वच्छता को विषय बनाया गया है।
आयोजकों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर लोगों का ध्यान खींचा जा सकता है। हालांकि, इस पहल को लेकर कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए हैं कि दशहरे की पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुति में समकालीन विषयों को किस हद तक शामिल किया जाना चाहिए।
दशहरे पर स्वच्छता का संदेश देने की कोशिश
दशहरा देशभर में रावण दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। दिल्ली की इस रामलीला में कॉकरोच का पुतला जोड़कर आयोजक इस परंपरा के साथ स्वच्छता का संदेश भी देना चाहते हैं।
अब यह पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। आयोजकों की ओर से इसे सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास बताया गया है, जबकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।