नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026 । केंद्र सरकार अक्टूबर 2026 में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। 16 अक्टूबर को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस संभावित सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर सरकार का फोकस
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का प्रमुख उद्देश्य महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन और परिसीमन से संबंधित विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाना है। महिला आरक्षण कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन से जुड़ी हुई है।
सरकार इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक संसदीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार कुछ क्षेत्रीय और छोटे दलों से भी बातचीत कर रही है।
पिछले सत्र से अभी तक लोकसभा में क्या बदला?
- DMK: ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग हो गई।
- TMC: पार्टी में बड़ी बगावत हुई और 21 सांसद टूटकर एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हो गए।
- शिवसेना (UBT): 6 सांसदों ने पाला बदलकर अलग गुट बना लिया। NDA को समर्थन दिया।
DMK से समर्थन जुटाने की कोशिश
अब केंद्र सरकार DMK से समर्थन लेने के लिए बातचीत कर रही है। तमिलनाडु चुनाव के बाद DMK का कांग्रेस से अलगाव हो चुका है।
इसके बाद DMK INDIA ब्लॉक से भी अलग हो गई। सूत्रों ने बताया कि सरकार कुछ छोटे दलों के संपर्क में भी है। इन दलों से बातचीत का मकसद सदन में सरकार के संख्या बल को मजबूत करना है।
पहले भी विधेयक को लेकर हो चुका है संसद में मुकाबला
इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक विशेष बहुमत नहीं मिल पाया था। अब सरकार दोबारा इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन जुटाने में लगी है।
इस बार भी विधेयकों को पारित कराने के लिए संविधान संशोधन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक बहुमत हासिल करना महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों का रुख और संसद में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।
रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार कुछ विपक्षी और क्षेत्रीय दलों से समर्थन हासिल करने के लिए बातचीत कर रही है। इनमें तमिलनाडु की डीएमके का नाम भी सामने आया है। हालांकि, परिसीमन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग चिंताएं हैं, इसलिए इस मुद्दे पर सहमति बनना महत्वपूर्ण होगा।
विशेष सत्र बुलाने की स्थिति में इसकी तारीखें और कार्यसूची सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी। फिलहाल, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक संभावित सत्र के प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आए हैं।