नई दिल्ली, 07 अक्टूबर 2026 । पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने अपनी जांच पूरी कर ली है। एजेंसी ने इस मामले में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिलने के बाद पॉक्सो की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है।
यह मामला जनवरी 2026 में छात्रा की मौत के बाद काफी चर्चा में आया था। परिवार ने बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया था। पहले बिहार पुलिस और एसआईटी ने जांच की और बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी गई। अब करीब आठ महीने की जांच के बाद CBI ने अदालत में अंतिम रिपोर्ट पेश की है।
CBI को नहीं मिला किसी के खिलाफ कोई सबूत
अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद ने बताया कि सीबीआई ने कोर्ट को सूचित किया है कि मामले में किसी के भी खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। अब मामले की अगली सुनवाई अब 13 अक्तूबर को होगी। इसके लिए अदालत ने सूचक (पीड़िता के पिता) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
6 जनवरी को बेहोश मिली थी छात्रा
जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी 2026 को वह हॉस्टल में बेहोश मिली थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
छात्रा की मौत के बाद परिवार ने गंभीर आरोप लगाए और मामले को हत्या तथा दुष्कर्म से जोड़कर जांच की मांग की। इसके बाद पटना में विरोध-प्रदर्शन भी हुए और जांच को लेकर कई सवाल उठाए गए।
पहले बिहार पुलिस और एसआईटी ने की जांच
शुरुआत में मामले की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन थानाध्यक्ष ने शुरू की थी। छात्रा के पिता के बयान के आधार पर 9 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई।
बाद में मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। जांच के दौरान हॉस्टल संचालक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, निर्धारित अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें नियमित जमानत मिल गई।
मामले को लेकर परिवार और अन्य पक्षों की ओर से जांच पर सवाल उठाए गए। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी।
CBI को नहीं मिला किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत
CBI ने मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की। एजेंसी ने उपलब्ध साक्ष्यों, बयानों और अन्य जांच सामग्री के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई चलाने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत उपलब्ध नहीं हैं।
इसी आधार पर CBI ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने मामले को बंद कर दिया है। क्लोजर रिपोर्ट पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
पटना की पॉक्सो विशेष अदालत में CBI की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत इस पर सुनवाई करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, 13 अक्टूबर को मामले की सुनवाई तय है और अदालत सूचक यानी छात्रा के पिता का पक्ष भी सुनेगी।
अदालत क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर सकती है, उसे अस्वीकार कर सकती है या जरूरत पड़ने पर आगे की जांच का निर्देश भी दे सकती है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामला पूरी तरह कानूनी रूप से खत्म हो गया है।
हॉस्टल संचालक मनीष रंजन भी रह चुके हैं आरोपी
इस मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था। हालांकि, बिहार पुलिस की एसआईटी और बाद में CBI निर्धारित अवधि में उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी।
इसके चलते उन्हें अदालत से नियमित जमानत मिल गई। अब CBI की क्लोजर रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में आरोपों और जांच के निष्कर्ष को लेकर एक नया कानूनी चरण शुरू हो गया है।
छात्रा के परिजनों ने शुरुआत से ही मौत को सामान्य घटना या आत्महत्या मानने पर सवाल उठाए थे। परिवार ने दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया था और जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका होने का भी दावा किया था।
हालांकि, CBI की मौजूदा जांच के मुताबिक किसी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन चलाने लायक ठोस सबूत नहीं मिला है। परिवार का पक्ष और CBI की क्लोजर रिपोर्ट अब अदालत के सामने है, जहां दोनों पक्षों को सुना जाएगा।
अब पूरे मामले की अगली दिशा अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी। 13 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत CBI की क्लोजर रिपोर्ट और सूचक के पक्ष को देखेगी।
अगर अदालत रिपोर्ट स्वीकार करती है तो CBI की मौजूदा जांच के आधार पर मामला बंद होने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वहीं, अदालत रिपोर्ट से असहमत होती है तो आगे की जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि CBI को किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिले और उसने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन अदालत ने अभी इस रिपोर्ट को मंजूर नहीं किया है।