पटना, 07 अक्टूबर 2026 । बिहार बीजेपी में विधायक विनय बिहारी के लगातार अलग रुख अपनाने का मामला अब पार्टी संगठन तक पहुंच गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधायक विनय बिहारी को तलब कर उनके हालिया बयानों और गतिविधियों को लेकर बात की। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत के दौरान उन्हें संगठन के अनुशासन का पालन करने और पार्टी लाइन के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की चेतावनी दी गई।
विनय बिहारी पिछले कुछ समय से अपनी ही सरकार और पार्टी के कामकाज को लेकर खुलकर सवाल उठाते रहे हैं। कभी उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाया तो कभी बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। ऐसे में उनका रुख पार्टी नेतृत्व के लिए चर्चा का विषय बन गया।
पार्टी नेतृत्व से फटकार के साथ कार्रवाई की चेतावनी
विधायक विनय बिहारी लगातार बिहार सरकार के प्रशासनिक कामकाज पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने न केवल विरोध जताते हुए धरना दिया, बल्कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सरकार के खजाने पर भी विवादित टिप्पणी की थी। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधायक को तलब कर उनके इस व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर जाकर अपनी ही सरकार और संगठन को असहज करने वाले बयानों से परहेज करें, अन्यथा पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मजबूर होगी।
क्यों नाराज हुआ पार्टी नेतृत्व?
विनय बिहारी ने हाल में बिहार सरकार की कुछ नीतियों को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। उन्होंने चुनाव के दौरान जीविका दीदियों को दी गई आर्थिक सहायता और सरकार के कर्ज लेकर विकास करने के तरीके पर सवाल खड़े किए।
बक्सर में दिए एक बयान में उन्होंने भोजपुरी गीत के जरिए सरकार की आर्थिक नीति पर तंज किया। उन्होंने कहा कि कर्ज लेकर विकास करना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव में कम मतदान और बीजेपी की हार को लेकर भी पार्टी को आत्ममंथन की नसीहत दी।
विनय बिहारी ने यहां तक कहा था कि पार्टी उनके बयान पर कार्रवाई कर सकती है। हालांकि उन्होंने बीजेपी को अपने लिए मंदिर बताते हुए कहा कि अगर उन्हें कुछ गलत दिखाई देता है तो बोलना उनका धर्म है।
बाढ़ राहत को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना
विनय बिहारी का सरकार से टकराव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। 29 सितंबर को लौरिया विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ राहत की स्थिति को लेकर वह पश्चिम चंपारण के बेतिया समाहरणालय परिसर में धरने पर बैठ गए थे।
उनका आरोप था कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से प्रभावित इलाकों का खुद दौरा करने की मांग की थी।
विनय बिहारी ने पूरे लौरिया विधानसभा क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने, पर्याप्त नाव और सामुदायिक रसोई उपलब्ध कराने, सूखा राशन देने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों और पुल-पुलियों की मरम्मत जैसी मांगें भी उठाईं।
सीएम सम्राट चौधरी को खुद करना पड़ा दौरा
विनय बिहारी के धरने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया। मुख्यमंत्री ने बगहा, बैरिया, योगापट्टी और नौतन सहित कई इलाकों का जायजा लिया।
विनय बिहारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के खातों में राहत राशि भेजने और प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई, प्लास्टिक तथा सूखे राशन की व्यवस्था के निर्देश दिए।
इस घटनाक्रम के बाद धरना खत्म हुआ, लेकिन पार्टी और सरकार के खिलाफ विधायक के सार्वजनिक रुख की चर्चा जारी रही।
विनय बिहारी पहले भी बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि प्रतिबंध के बावजूद शराब उपलब्ध होने की शिकायतें हैं।
इसके अलावा विधानसभा में वह अपने क्षेत्र की सड़क और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे भी लगातार उठाते रहे हैं। यानी पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहे हैं।
नितिन नवीन ने क्या संदेश दिया?
विनय बिहारी को तलब करने के घटनाक्रम को बीजेपी संगठन की ओर से अनुशासन पर जोर देने के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की चिंता यह है कि सार्वजनिक मंच से अपनी ही सरकार के खिलाफ लगातार बयान आने से संगठन की आधिकारिक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नितिन नवीन ने उन्हें चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसे बयानों से बचने को कहा है और कार्रवाई की संभावना भी जताई है।
हालांकि, विनय बिहारी की ओर से उठाए गए मुद्दों में बाढ़ राहत, विकास और सरकारी योजनाओं से जुड़े स्थानीय सवाल शामिल हैं। इसलिए उनके बयानों को केवल पार्टी विरोध के रूप में देखना भी पूरे घटनाक्रम को नहीं दर्शाता।
फिलहाल मामला चेतावनी और संगठनात्मक स्तर पर बातचीत तक है। कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अब देखना होगा कि नितिन नवीन की चेतावनी के बाद विनय बिहारी सार्वजनिक रूप से पार्टी और सरकार की नीतियों पर अपनी राय किस तरह रखते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि उनके उठाए स्थानीय मुद्दों पर सरकार और संगठन आगे क्या रुख अपनाते हैं।