राज्यसभा की तीसरी सीट पर सस्पेंस खत्म होने के संकेत, अखिलेश बोले- तीन नहीं, 403 पर है नजर
लखनऊ, 06 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” उनके इस बयान को राज्यसभा की तीसरी सीट से पीछे हटने और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर फोकस करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा पहले ही वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवार नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। अब अखिलेश यादव के बयान के बाद पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर चल रही चर्चा लगभग खत्म होती नजर आ रही है।
अखिलेश यादव ने अपने छोटे से सोशल मीडिया पोस्ट में राज्यसभा की तीन संभावित सीटों और उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों के बीच अंतर स्पष्ट किया। राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को उतारने की संभावना पिछले कई दिनों से चर्चा में थी, लेकिन मंगलवार को उनके बयान ने पार्टी की प्राथमिकता का संकेत दे दिया।
अखिलेश का 403 का जिक्र सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सीटों की ओर इशारा करता है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सपा के दो उम्मीदवार पहले ही मैदान में
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने लखनऊ में नामांकन दाखिल कर दिया है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। यदि सपा तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारती है तो बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बनती है।
तीसरे उम्मीदवार के लिए क्यों था सस्पेंस?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोटों की जरूरत बताई जा रही है। सपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ती।
इसी वजह से तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने की स्थिति में चुनावी मुकाबला और वोटों की गणित महत्वपूर्ण हो जाती। पिछले दिनों सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार के लिए समर्थन जुटाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं।
अखिलेश यादव के मंगलवार के बयान से पहले सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। सोमवार को पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार के लिए प्रस्तावक के तौर पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह सवाल बना हुआ था कि सपा अंतिम समय में तीसरा उम्मीदवार उतारेगी या नहीं। मंगलवार को नामांकन की अंतिम तारीख होने के बीच अखिलेश यादव के बयान ने इस चर्चा को नई दिशा दे दी।
अब 2027 विधानसभा चुनाव पर फोकस
अखिलेश यादव के 403 सीटों वाले बयान को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां पहले से तेज हैं।
सपा के लिए अब संगठन, विधानसभा क्षेत्रों और चुनावी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करना प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो सकता है। हालांकि पार्टी की आगे की रणनीति और सीटों को लेकर औपचारिक फैसले अलग-अलग स्तर पर सामने आएंगे।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा।
यदि उम्मीदवारों की संख्या 10 से अधिक नहीं रहती है, तो मतदान की आवश्यकता नहीं होगी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा सकते हैं।
यूपी की राजनीति में 403 पर नजर
अखिलेश यादव का बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों का ध्यान विधानसभा चुनाव की ओर और बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल अखिलेश यादव के बयान से इतना संकेत जरूर मिलता है कि सपा राज्यसभा की तीसरी सीट के बजाय उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को अपनी राजनीतिक प्राथमिकता के तौर पर देख रही है। तीसरे उम्मीदवार को लेकर अंतिम स्थिति नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी तरह स्पष्ट होगी।