पटना, 26 सितंबर 2026 । बिहार में चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी चर्चा का विषय बन गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। दूसरी ओर, जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए उस पर निशाना साधा है।
चिराग पासवान ने पारदर्शिता पर दिया जोर
चिराग पासवान ने कहा कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वह स्थिति स्पष्ट करे। उनके मुताबिक चुनाव को लेकर जनता के बीच भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
चिराग ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी व्यक्ति विशेष के बचाव या विरोध के तौर पर नहीं है, बल्कि संवैधानिक संस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने SIR पर मांगा स्पष्टीकरण
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कुशवाहा ने आयोग से बिना देरी आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की, ताकि SIR से जुड़े सवालों और आशंकाओं पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
दूसरी तरफ, JDU ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर अलग रुख अपनाया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने RJD के आरोपों को राजनीतिक विफलता छिपाने की कोशिश बताया।
JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। ये राजनीतिक दलों के बयान हैं और इन्हें संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
NDA के दूसरे सहयोगियों की भूमिका भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी की स्थिति पर भी चर्चा है। ताजा रिपोर्ट में उन्हें इस मुद्दे पर फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में बताया गया है। यानी उन्होंने चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की तरह सार्वजनिक रूप से कोई समान मांग सामने नहीं रखी है।
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे के साथ-साथ SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के दल इन आरोपों को राजनीतिक बताते रहे हैं।
ऐसे में चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की ओर से आयोग से स्पष्टीकरण की मांग इस बहस को NDA के भीतर भी चर्चा का विषय बनाती है। हालांकि, किसी भी आरोप या राजनीतिक दावे का आकलन निर्वाचन आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
‘मौसम वैज्ञानिक’ वाली राजनीति का संदर्भ
बिहार की राजनीति में ‘मौसम वैज्ञानिक’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर उन नेताओं के लिए किया जाता रहा है जो राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता समीकरणों को भांपने के लिए जाने जाते हैं। मौजूदा रिपोर्ट में इसी राजनीतिक मुहावरे के जरिए NDA के सहयोगी दलों के अलग-अलग रुख को संदर्भित किया गया है।
फिलहाल मुख्य मुद्दा यह है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है। दूसरी ओर, NDA के अलग-अलग सहयोगी दलों के बयानों से यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।