टेक सपोर्ट के नाम पर अमेरिका में 100 करोड़ की ठगी का आरोप

FBI का डर दिखाकर करते थे वसूली; पीतमपुरा से 11 गिरफ्तार

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नई दिल्ली, 25  सितंबर 2026 । दिल्ली के पीतमपुरा में चल रहे एक कथित अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर का दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक, यहां से अमेरिका में रहने वाले लोगों को टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाया जाता था। इस मामले में दो महिलाओं समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का अनुमान है कि गिरोह ने अमेरिकी पीड़ितों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की।

पीतमपुरा में दो मंजिलों पर चल रहा था कॉल सेंटर

दिल्ली पुलिस की IFSO टीम को पीतमपुरा में एक अवैध इंटरनेशनल कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद 21 सितंबर को पीतमपुरा गांव के शिवाजी मार्केट स्थित किराये के परिसर की तीसरी और चौथी मंजिल पर छापेमारी की गई। पुलिस के मुताबिक, मौके पर 11 लोग कॉल सेंटर का संचालन करते मिले।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 41 लाख रुपये नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, आठ राउटर और एक वाहन बरामद किया। मामले में 22 सितंबर को नई दिल्ली के स्पेशल सेल थाने में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस के अनुसार, गिरोह का कथित तरीका काफी संगठित था। अमेरिका में मौजूद लोगों के कंप्यूटर में दूर से मैलवेयर इंस्टॉल किए जाने का आरोप है। इसके बाद कंप्यूटर स्क्रीन पर तकनीकी सहायता के लिए एक पॉप-अप दिखाई देता था, जिसमें एक टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था।

जब पीड़ित उस नंबर पर फोन करते थे तो उनकी कॉल सॉफ्ट-फोन एप्लिकेशन के जरिये पीतमपुरा स्थित कॉल सेंटर तक पहुंचती थी। वहां मौजूद एजेंट पहले से तैयार स्क्रिप्ट के आधार पर खुद को टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताते थे और पीड़ितों से कहते थे कि उनके कंप्यूटर में वायरस या सुरक्षा संबंधी समस्या है।

रिमोट एक्सेस लेकर बैंक खाते का डर दिखाने का आरोप

पुलिस का कहना है कि इसके बाद पीड़ितों को कथित तौर पर ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए तैयार किया जाता था, जिससे आरोपियों को कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद उन्हें बताया जाता था कि समस्या केवल कंप्यूटर तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके बैंक खाते भी खतरे में हैं।

इसके बाद कॉल को गिरोह के दूसरे सदस्य के पास ट्रांसफर किए जाने का आरोप है, जो खुद को बैंक अधिकारी बताता था। कथित फर्जी बैंक अधिकारी अमेरिकी नंबरों और वॉयस एप्लिकेशन के माध्यम से पीड़ितों से संपर्क करते थे।

गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे लेने का आरोप

जांच के अनुसार, पीड़ितों को कथित तौर पर बैंक या तकनीकी समस्या ठीक करने के नाम पर गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था। कुछ मामलों में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करने के लिए भी दबाव बनाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, गिफ्ट कार्ड की जानकारी ऑनलाइन ग्रुप में गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ साझा की जाती थी और बाद में उसे रिडीम या कैश कराया जाता था।

FBI और अमेरिकी एजेंसियों के नाम से फर्जी संदेश

पुलिस के अनुसार, ठगी को ज्यादा विश्वसनीय दिखाने और पीड़ितों पर दबाव बनाने के लिए कुछ मामलों में FBI और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों के नाम से कथित फर्जी संचार भेजे जाते थे।

इससे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती थी कि उनके कंप्यूटर या बैंक खाते से जुड़ा मामला गंभीर है और तत्काल बताए गए निर्देशों का पालन करना जरूरी है। पुलिस इसी तरीके को गिरोह के कथित फ्रॉड ऑपरेशन का अहम हिस्सा मान रही है।

पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर में काम करने वाले आरोपी अमेरिकी पीड़ितों से बातचीत के दौरान अलग-अलग फर्जी नामों का इस्तेमाल करते थे। जांच में विलियम्स, रयान, सोफी, गेनी और एलेक्स जैसे नामों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

पुलिस का कहना है कि इस तरह कॉल करने वालों के सामने एक व्यवस्थित विदेशी टेक-सपोर्ट कंपनी का माहौल बनाने की कोशिश की जाती थी।

11 आरोपियों की गिरफ्तारी, अन्य सदस्यों की तलाश जारी

पुलिस ने इस मामले में कवल प्रीत सिंह उर्फ सनी सिंह, प्रशांत नंदा, अक्षत सिंह उर्फ शिवम, चित्रा नरह, रोहन जयरथ, गौरव सकलानी, सचिन घिल्डियाल उर्फ सचिन शर्मा, इरशाद रहमान, नवनीत उर्फ नवीन, निंगथौजाम और फेबो वांगशू को गिरफ्तार किया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह से जुड़े भारत और विदेश में मौजूद कुछ अन्य प्रमुख सदस्यों की भी पहचान की गई है। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस मामले में कॉल सेंटर के नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।

इस मामले में सामने आया कथित तरीका दिखाता है कि टेक-सपोर्ट फ्रॉड में पीड़ित को पहले कंप्यूटर में समस्या होने का विश्वास दिलाया जाता है। इसके बाद रिमोट एक्सेस, बैंक खाते के खतरे और सरकारी एजेंसी के नाम से डर पैदा करके उसे भुगतान के लिए तैयार करने का आरोप है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, कथित तौर पर ठगी गई रकम के प्रवाह और विदेश में मौजूद संपर्कों पर है। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी रखी है।

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