ट्रांसफर के बाद 15 दिन में रिलीविंग जरूरी

नई पोस्टिंग पर जॉइनिंग नहीं हुई तो कार्रवाई

0

नई दिल्ली, 23  सितंबर 2026 । दिल्ली पुलिस में ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर नियमों के पालन को अब और सख्त किया गया है। पुलिसकर्मियों के तबादले के आदेश जारी होने के बाद उन्हें अधिकतम 15 दिन के भीतर मौजूदा यूनिट से रिलीव करना होगा, ताकि वे नई पोस्टिंग पर समय से जॉइन कर सकें। अगर किसी कर्मचारी को तय समय में रिलीव नहीं किया जाता है तो संबंधित जिला या यूनिट के DCP को इसके लिए जवाबदेह माना जाएगा।

  • जॉइंट सीपी (हेडक्वार्टर) अजय कृष्ण शर्मा की ओर से जारी सर्कुलर की कॉपी सभी एडिशनल सीपी, जिला और यूनिट डीसीपी के अलावा संबंधित सीनियर अफसरों को भेजी गई है।
  • आदेश के मुताबिक, ट्रांसफर के बाद सैलरी से जुड़ी व्यवस्था भी साफ कर दी गई है। कार्यमुक्त पुलिसकर्मी का लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) संबंधित एसीपी या संबंधित अधिकारी के जरिए नई यूनिट को भेजा जाएगा। ऐसे में जिस जिले या यूनिट से पुलिसकर्मी का ट्रांसफर हुआ है, वहां से तबादले वाले महीने के बाद की सैलरी नहीं मिल सकेगी।
  • दूसरी तरफ, अगर कोई स्टाफ ट्रांसफर ऑर्डर के बाद नई यूनिट में रिपोर्ट नहीं करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • ऐसे कर्मचारी के खिलाफ अनुपस्थिति का नोटिस जारी करने से लेकर विभागीय कार्रवाई तक की जिम्मेदारी नई यूनिट की होगी। यानी अब ट्रांसफर के बाद न तो पुरानी यूनिट स्टाफ को अनिश्चितकाल तक रोक सकती है और न ही पुलिसकर्मी नई यूनिट में रिपोर्टिंग से बच सकता है।

ट्रांसफर आदेश के 15 दिन के भीतर करना होगा रिलीव

दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश में सभी जिलों और यूनिट्स को ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसफर आदेश की तारीख से 15 दिन के भीतर संबंधित पुलिसकर्मी को पुरानी पोस्टिंग से कार्यमुक्त कर नई यूनिट में भेजना होगा।

इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ट्रांसफर के बाद पुलिसकर्मी लंबे समय तक पुरानी यूनिट में ही तैनात न रहें और नई जिम्मेदारी संभालने में अनावश्यक देरी न हो।

रिलीविंग में देरी हुई तो DCP होंगे जिम्मेदार

नए निर्देशों में जिला और यूनिट स्तर के DCP की जवाबदेही भी स्पष्ट की गई है। यदि ट्रांसफर आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर पुलिसकर्मी को रिलीव नहीं किया जाता है तो संबंधित DCP से जवाब मांगा जा सकता है।

दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (हेडक्वॉर्टर) अजय कृष्ण शर्मा की ओर से जारी सर्कुलर की जानकारी सभी एडिशनल CP, जिला और यूनिट DCP तथा संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, तय समयसीमा के भीतर रिलीविंग नहीं होने की स्थिति में पुलिस मुख्यालय के रोजनामचा में संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त माना जाएगा। इससे ट्रांसफर आदेश के बाद लंबे समय तक पुरानी यूनिट में बने रहने की व्यवस्था पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।

इसके साथ ही नई यूनिट में रिपोर्ट नहीं करने वाले पुलिसकर्मी भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। यानी जिम्मेदारी केवल पुरानी यूनिट की नहीं होगी, बल्कि नई पोस्टिंग पर जॉइन नहीं करने वाले कर्मचारी के खिलाफ भी विभागीय प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

नई पोस्टिंग पर नहीं पहुंचे तो विभागीय कार्रवाई

ट्रांसफर के बाद यदि कोई पुलिसकर्मी नई यूनिट में रिपोर्ट नहीं करता है तो संबंधित नई यूनिट को अनुपस्थिति का नोटिस जारी करने से लेकर विभागीय कार्रवाई तक की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इससे व्यवस्था में दोनों पक्षों की जिम्मेदारी तय होती है। पुरानी यूनिट कर्मचारी को अनावश्यक रूप से रोक नहीं सकेगी और ट्रांसफर किया गया पुलिसकर्मी भी नई पोस्टिंग पर रिपोर्टिंग से बच नहीं सकेगा।

ट्रांसफर के बाद कार्यमुक्त किए गए पुलिसकर्मी के लास्ट पे सर्टिफिकेट यानी LPC को संबंधित अधिकारी के माध्यम से नई यूनिट भेजने की व्यवस्था भी बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस जिले या यूनिट से पुलिसकर्मी का ट्रांसफर हुआ है, वहां से ट्रांसफर वाले महीने के बाद की सैलरी नहीं मिलने की व्यवस्था की गई है।

जांच अधिकारियों के लिए अलग समयसीमा

दिल्ली पुलिस की ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति में जांच अधिकारियों के लिए सामान्य 15 दिन की समयसीमा से अलग प्रावधान है। लंबित केस फाइल, शिकायतों और अन्य जांच संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा कर उन्हें सौंपने के लिए जांच अधिकारियों को 30 दिन तक का समय दिया जा सकता है।

वहीं सब-डिविजन में तैनात कुछ अधिकारियों, जैसे ACP, SHO और संबंधित निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के अलावा शिकायत के आधार पर ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों को तत्काल रिलीव करने का प्रावधान बताया गया है।

यदि किसी पुलिसकर्मी या संबंधित यूनिट की ओर से ट्रांसफर रोकने या रद्द करने का अनुरोध किया जाता है, तो कुछ परिस्थितियों में रिलीविंग को सीमित अवधि तक टाला जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे मामलों में मुख्यालय को निर्धारित अवधि के भीतर फैसला करना होगा। यदि तय अवधि में निर्णय नहीं होता है तो आवेदन को अस्वीकार माना जा सकता है।

क्यों अहम है यह व्यवस्था?

दिल्ली पुलिस में ट्रांसफर आदेश जारी होने के बावजूद कर्मचारियों के लंबे समय तक पुरानी यूनिट में बने रहने की समस्या को देखते हुए यह निर्देश महत्वपूर्ण है। नई व्यवस्था में समयसीमा तय होने के साथ-साथ जिला और यूनिट स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी स्पष्ट की गई है।

इससे ट्रांसफर आदेशों के समय पर पालन, नई यूनिट में कर्मचारियों की उपलब्धता और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे पर जोर दिया गया है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.