यूपी की 50 सीटों पर अखिलेश की नजर,
2022 में 10 हजार से कम वोटों से तय हुआ था नतीजा
लखनऊ , 22 सितंबर 2026 । उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उन विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की रणनीति बनाई है, जहां 2022 के चुनाव में जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी करीब 50 सीटें हैं जहां 10 हजार या उससे कम वोटों के अंतर से चुनाव परिणाम तय हुआ था।
इन सीटों पर मुकाबला कितना करीबी था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2022 के चुनाव में 49 सीटों पर जीत का अंतर 5 हजार से भी कम था। धामपुर में जीत का अंतर महज 203 वोट और कुर्सी विधानसभा सीट पर 217 वोट रहा था।
इसमें से ज्यादातर सीटों पर बीजेपी या उसके सहयोगी दल को जीत मिली थी। अब सपा 27,000 वोट बढ़ाकर कम अंतर वाली विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना चाहती है।
क्या है राजनीतिक लक्ष्य
पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 15 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर 1000 से भी कम था। इन 15 में से 6 सीटें समाजवादी पार्टी को मिलीं और 8 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। एक सीट पर निषाद पार्टी के रमेश सिंह जीते थे। इसी तरह 14 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर 1000 से 2000 वोटों के बीच था। इनमें से 7 सीटें बीजेपी ने, 4 सीटें सपा ने, 2 सीटें अपना दल (सोनेलाल) ने जीतीं और एक सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी।
2022 में कई सीटों पर बेहद कांटे का मुकाबला
2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों में कई सीटों पर पहले और दूसरे स्थान के उम्मीदवारों के बीच अंतर बहुत कम रहा। उदाहरण के तौर पर धामपुर में बीजेपी के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईम-उल-हसन को 203 वोट से हराया था। वहीं कुर्सी में बीजेपी के सकेंद्र प्रताप ने सपा के राकेश कुमार वर्मा पर 217 वोट की बढ़त हासिल की थी।
इसी तरह बलदेव सिंह औलख ने 307 वोट, बड़ौत में कृष्ण पाल मलिक ने 315 वोट और नकुड़ में बीजेपी के मुकेश चौधरी ने 315 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी। ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मामूली वोटों का अंतर भी अंतिम नतीजे पर असर डाल सकता है।
सपा का 27 हजार वोटों का लक्ष्य
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने 27 विधानसभा क्षेत्रों को लेकर अलग रणनीति का भी उल्लेख किया है। इसमें पार्टी ने इन चिन्हित सीटों पर अपने वोट आधार को 27 हजार वोट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समूहों के बीच अपना संगठनात्मक आधार मजबूत करने पर भी जोर दे रही है।
यह रणनीति 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के बूथ स्तर के संगठन और स्थानीय अभियान को मजबूत करने की कोशिश के रूप में सामने आई है। हालांकि चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करते हैं और 2022 के आंकड़े भविष्य के परिणाम का सीधा संकेत नहीं माने जा सकते।
2022 के आंकड़ों से क्या पता चलता है?
2022 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में सीटें जीती थीं, लेकिन उसके कई मुकाबलों में जीत का अंतर 10 हजार वोट से कम था। उपलब्ध चुनावी विश्लेषण के अनुसार बीजेपी की 63 सीटों पर जीत का अंतर 10 हजार से कम रहा था, जिनमें 8 सीटें ऐसी थीं जहां अंतर एक हजार से भी कम था।
दूसरी ओर, सपा के कई उम्मीदवार भी बेहद करीबी मुकाबलों में चुनाव हारे थे। 5 हजार से कम वोटों के अंतर से हारने वाले उम्मीदवारों में सपा की संख्या 25 बताई गई थी।
इसलिए 2022 की करीबी सीटों का आंकड़ा आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों के संगठनात्मक विश्लेषण में महत्वपूर्ण हो सकता है। सपा अब इन्हीं क्षेत्रों में अपनी चुनावी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।