मुजफ्फरपुर, 18 सितंबर 2026। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश में जारी बहस के बीच इस्लामिक विद्वान और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि वह UCC के विरोध में नहीं हैं। हालांकि, उनके मुताबिक समान नागरिक संहिता तैयार करते समय समानता, महिलाओं के अधिकार, गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
धार्मिक स्वतंत्रता का भी सम्मान होना चाहिए: हाजी मोहम्मद परवेज
हाजी मोहम्मद परवेज ने बताया कि इसे लेकर उन्होंने बीते दिनों पीएम मोदी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने संविधान के अनुच्छेद का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों के बीच समानता और गरिमा को सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन कानूनी सुधार की प्रक्रिया में संविधान की ओर से संरक्षित धार्मिक स्वतंत्रता का भी सम्मान होना चाहिए।
हर विवाह के अनिवार्य पंजीकरण की मांग
हाजी परवेज सिद्दीकी ने विवाह से जुड़े नियमों को लेकर कई प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने हर विवाह का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने की बात कही।
इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के मेहर, भरण-पोषण, विरासत और संपत्ति से जुड़े अधिकारों को स्पष्ट कानूनी संरक्षण देने की मांग रखी है। उनका कहना है कि ऐसे प्रावधान महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
तलाक से लेकर बहुविवाह तक हाजी परवेज ने रखा प्रस्ताव
हाजी परवेज सिद्दीकी ने प्रस्ताव रखा है कि हर विवाह का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। महिलाओं के मेहर, भरण-पोषण, विरासत और संपत्ति संबंधी अधिकारों को स्पष्ट कानूनी संरक्षण दिया जाए। तलाक की प्रक्रिया में न्यायिक एवं प्रक्रियात्मक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, अभिरक्षा और बहुविवाह के मामले में कड़ा कानूनी नियम और न्यायिक निगरानी के साथ सभी पत्नियों और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर विचार किया जाए। किसी भी धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
बहुविवाह पर कड़े नियम और न्यायिक निगरानी की मांग
बहुविवाह के मुद्दे पर भी हाजी परवेज सिद्दीकी ने अपना प्रस्ताव रखा। उन्होंने कड़े कानूनी नियमों और न्यायिक निगरानी की बात कही। उनके मुताबिक ऐसी व्यवस्था में सभी पत्नियों और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
यह उनके द्वारा UCC को लेकर सुझाया गया प्रस्ताव है, न कि वर्तमान कानून में बदलाव की कोई घोषित व्यवस्था।
सभी पक्षों से चर्चा की बात
हाजी परवेज सिद्दीकी ने UCC को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता बताई। उन्होंने धार्मिक संगठनों, महिला संगठनों, कानून विशेषज्ञों, सामाजिक प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को चर्चा में शामिल करने का सुझाव दिया।
उनका कहना है कि भारत की सामाजिक और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए किसी भी कानूनी व्यवस्था को भारतीय संवैधानिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए।
मुस्लिम बहुल देशों का भी दिया उदाहरण
रिपोर्ट के अनुसार, हाजी परवेज सिद्दीकी ने मोरक्को और मलेशिया जैसे मुस्लिम-बहुल देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ विवाह, तलाक और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनों में सुधार किए जा सकते हैं।
उन्होंने साथ ही कहा कि भारत को किसी विदेशी मॉडल की सीधी नकल करने के बजाय अपने संविधान और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
UCC पर उनका स्पष्ट रुख
हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने दोहराया कि वह UCC के विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था में संविधान, महिलाओं के अधिकार, बच्चों के हित और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन होना चाहिए।
उनके इस बयान से UCC पर चल रही बहस में विवाह पंजीकरण, तलाक, भरण-पोषण, विरासत और बहुविवाह जैसे पारिवारिक कानूनों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में आए हैं।