जामिया में प्रदर्शन के बाद छात्राओं का आरोप, पूछताछ और दबाव से बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की मेस व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्राओं का विरोध प्रदर्शन अब नए विवाद में बदलता नजर आ रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने आरोप लगाया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है और कुछ अधिकारी उन पर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि उन्हें अपने भविष्य और विश्वविद्यालय में आगे की पढ़ाई को लेकर चिंता होने लगी है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष है कि हॉस्टल के नियमों के पालन को लेकर छात्राओं से जानकारी ली जा रही है।

  • पिछले दिनों जामिया के जम्मू और कश्मीर हॉस्टल की मेस में कीड़े निकलने का आरोप लगाकर छात्राओं ने सेंटेनरी गेट पर प्रदर्शन किया था।
  • तीन दिन तक प्रदर्शन चलने के बाद छात्राओं ने मेस का कॉन्ट्रैक्टर बदलने, हॉस्टल के कुछ अधिकारियों को हटाने की मांग की थी।
  • जामिया प्रशासन के दूसरे कॉन्ट्रैक्टर से खाना बनवाने के बाद प्रोटेस्ट खत्म हो गया। अब छात्राएं आरोप लगा हैं कि हॉस्टल की एक अधिकारी छात्राओं पर अनावश्यक दबाव बना रही हैं।
  • इंजीनियरिंग की एक छात्रा ने बताया कि उन्हें बीच रास्ते में रोककर पूछा जा रहा है कि प्रोटेस्ट में क्यों शामिल हुई थीं।
  • वहीं, इस पूरे मामले पर जामिया के एक अधिकारी ने कहा कि वार्डन छात्राओं के हित में काम कर रही हैं। हॉस्टल रूल्स को फॉलो करने को कहा जा रहा है, लेकिन वह इसे ज्यादती बता रही हैं।

अब अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप

ताजा विवाद प्रदर्शन में शामिल छात्राओं से पूछताछ को लेकर है। छात्राओं का आरोप है कि एक अधिकारी उन्हें रास्ते में रोककर पूछ रही हैं कि वे प्रदर्शन में क्यों शामिल हुई थीं। हॉस्टल में भी छात्राओं से प्रदर्शन को लेकर जानकारी लिए जाने की बात सामने आई है।

एक छात्रा ने दावा किया कि इस तरह की पूछताछ से उन्हें डर और दबाव महसूस हो रहा है। छात्राओं ने प्रशासन से मांग की है कि प्रदर्शन में भाग लेने के कारण उन्हें परेशान न किया जाए और पूरे मामले में निष्पक्ष तरीके से स्थिति स्पष्ट की जाए।

प्रशासन ने आरोपों पर क्या कहा?

जामिया प्रशासन की ओर से छात्राओं के आरोपों को अलग नजरिए से देखा गया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक, हॉस्टल की वार्डन छात्राओं के हित में काम कर रही हैं और उनसे हॉस्टल नियमों के पालन को लेकर जानकारी ली जा रही है।

इसलिए फिलहाल छात्राओं द्वारा लगाए गए दबाव और धमकी के आरोप तथा प्रशासन की ओर से दी गई सफाई, दोनों सामने हैं। मामले में किसी स्वतंत्र जांच या अंतिम निष्कर्ष के बिना आरोपों को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

पहले भी सामने आए थे प्रशासन से जुड़े आरोप

इस पूरे विवाद के दौरान छात्र संगठनों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कुछ छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने वाली छात्राओं पर दबाव बनाया गया। वहीं विश्वविद्यालय की ओर से प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा हॉस्टल के गेट को नुकसान पहुंचाने और प्रॉक्टोरियल टीम के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए गए थे। इन आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

छात्राओं की मांग अब जांच और स्पष्टता की

ताजा घटनाक्रम के बाद छात्राएं चाहती हैं कि प्रशासन पूरे मामले को स्पष्ट करे और यह सुनिश्चित करे कि मेस से जुड़ी शिकायत उठाने या शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी छात्रा को अनुचित दबाव का सामना न करना पड़े।

वहीं, विश्वविद्यालय के लिए चुनौती यह है कि हॉस्टल अनुशासन और छात्राओं की शिकायतों के बीच संतुलन बनाया जाए। फिलहाल विवाद का केंद्र मेस की समस्या से आगे बढ़कर प्रदर्शन के बाद छात्राओं से हो रही पूछताछ और कथित दबाव पर आ गया है।

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