कार्डिफ, 15 सितंबर 2026। ब्रिटेन की राजनीतिक एकता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के राष्ट्रवादी दलों के नेताओं ने कार्डिफ में मुलाकात कर अपने-अपने क्षेत्रों के आत्मनिर्णय और संवैधानिक भविष्य के अधिकार का समर्थन किया। तीनों पक्षों ने एक संयुक्त समझौते के जरिए ब्रिटेन की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज कर दी है।
स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड को ब्रिटेन से अलग करने की मांग करने वाली पार्टियों के नेता पहली बार एक साथ बैठे। वेल्स की राजधानी कार्डिफ में हुई इस बैठक में उन्होंने कहा कि इन देशों के लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है।
तीनों नेताओं ने ब्रिटेन की संसद वेस्टमिंस्टर से कहा कि वह लोगों को आजादी के लिए लोकतांत्रिक तरीके से फैसला करने से नहीं रोक सकती।
तीनों पार्टियां चाहती हैं कि उनके क्षेत्रों को ब्रिटेन से ज्यादा अधिकार मिलें और आगे चलकर वे अलग देश बन सकें। हालांकि, आजादी के लिए जनमत संग्रह कब और किस तरह कराया जाए, इसे लेकर तीनों पार्टियों की राय अलग-अलग है।
पहली बार तीनों क्षेत्रों के राष्ट्रवादी दल साथ आए
14 सितंबर 2026 को कार्डिफ में हुई बैठक को ब्रिटेन की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। स्कॉटलैंड की SNP, वेल्स की Plaid Cymru और नॉर्दर्न आयरलैंड की Sinn Féin के नेताओं ने एक साझा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते में कहा गया कि इन क्षेत्रों के लोगों को अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है और वेस्टमिंस्टर की सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से संवैधानिक बदलाव की मांग को रोकना नहीं चाहिए।
ऐसा नहीं है। यह समझौता तत्काल स्वतंत्रता की घोषणा नहीं है। बल्कि तीनों राष्ट्रवादी दलों ने self-determination यानी आत्मनिर्णय और भविष्य में संवैधानिक बदलाव के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ाया है।
स्कॉटलैंड में SNP लंबे समय से स्वतंत्रता के लिए दूसरा जनमत संग्रह चाहता है। वेल्स में Plaid Cymru अधिक स्वायत्तता और अंततः स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ने की वकालत करती है। वहीं Sinn Féin नॉर्दर्न आयरलैंड को आयरलैंड गणराज्य के साथ जोड़ने की मांग करता रहा है।
स्कॉटलैंड में फिर उठी स्वतंत्रता जनमत संग्रह की मांग
स्कॉटलैंड की राजनीति में स्वतंत्रता का मुद्दा नया नहीं है। 2014 में हुए जनमत संग्रह में स्वतंत्रता के प्रस्ताव को बहुमत नहीं मिला था, लेकिन SNP ने इसके बाद भी दूसरा रेफरेंडम कराने की मांग जारी रखी।
ताजा घटनाक्रम में SNP नेता जॉन स्विनी ने फिर यह संदेश दिया है कि स्कॉटलैंड के लोगों को अपने संवैधानिक भविष्य पर फैसला करने का अधिकार होना चाहिए। हालांकि ब्रिटेन की मौजूदा सरकार ने तत्काल दूसरे स्वतंत्रता जनमत संग्रह की संभावना को खारिज किया है।
वेल्स में Plaid Cymru का प्रभाव भी इस मुद्दे को नई राजनीतिक दिशा दे रहा है। पार्टी नेता रुन एप इयोरवेर्थ ने ब्रिटेन की शासन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत पर जोर दिया है।
वेल्स का मामला स्कॉटलैंड से कुछ अलग है। यहां स्वतंत्रता के समर्थन का स्तर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन अधिक अधिकार और राष्ट्रीय पहचान को लेकर राजनीतिक बहस लगातार मजबूत हो रही है।
नॉर्दर्न आयरलैंड का मामला सबसे अलग है। Sinn Féin ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड गणराज्य के साथ एकीकरण की समर्थक है। पार्टी की नेता मिशेल ओ’नील ने आत्मनिर्णय और भविष्य में बॉर्डर पोल यानी एकीकरण पर जनमत संग्रह की मांग को आगे बढ़ाया है।
यह मुद्दा हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आयरलैंड के एकीकरण पर टिप्पणी के बाद भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आया है। हालांकि ब्रिटेन सरकार ने स्पष्ट किया है कि नॉर्दर्न आयरलैंड की संवैधानिक स्थिति को लेकर उसकी नीति में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।
ब्रिटेन सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के राष्ट्रवादी नेताओं के एक साथ आने से लंदन की सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि संवैधानिक रूप से इन तीनों क्षेत्रों के पास एकतरफा तरीके से ब्रिटेन से अलग होने का अधिकार नहीं है।
ब्रिटेन की मौजूदा व्यवस्था में स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड को अलग-अलग स्तर की devolved powers हासिल हैं, जबकि रक्षा और विदेश नीति जैसे प्रमुख विषय वेस्टमिंस्टर के अधिकार क्षेत्र में हैं।
क्या टूट जाएगा यूनाइटेड किंगडम?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ब्रिटेन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। तीनों क्षेत्रों में स्वतंत्रता को लेकर समर्थन का स्तर अलग-अलग है और जनमत संग्रह की मांगों के लिए अलग-अलग राजनीतिक और कानूनी प्रक्रियाएं लागू होंगी।
फिर भी, पहली बार स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के प्रमुख राष्ट्रवादी दलों का एक मंच पर आना ब्रिटेन की संवैधानिक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। इससे आने वाले समय में UK की एकता, क्षेत्रीय स्वायत्तता और स्वतंत्रता को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।