पटना, 15 सितंबर 2026। बिहार की सियासत में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की सक्रियता ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। हाल के दिनों में उनके कई कदमों को लेकर NDA के भीतर नए समीकरणों की अटकलें लग रही हैं। खासकर समान नागरिक संहिता (UCC) और बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर जेडीयू की रणनीति ने सहयोगी दलों का ध्यान खींचा है।
बिहार में लागू नहीं होगा यूसीसी: श्याम रजक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जैसे ही वर्ष 2029 तक सभी राज्यों (समान नागरिक संहिता) यूसीसी लागू करने की घोषणा की, लालू स्कूल के प्रोडक्ट जदयू नेताओं में खलबली मच गई। पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में यूसीसी बिल का समर्थन किया था, लेकिन तभी ये साफ कर दिया था कि इसे अपने राज्य (बिहार) में लागू नहीं किया जाएगा।
UCC पर संजय झा की सक्रियता से बढ़ी हलचल
केंद्र की ओर से UCC को लेकर सामने आए रुख के बाद बिहार NDA में मतभेद के संकेत दिखाई दे रहे हैं। जेडीयू ने बिहार में UCC को लेकर अपनी अलग स्थिति रखी है। इसी बीच संजय झा के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की योजना की खबर ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। इसे NDA के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
जेडीयू नेताओं की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि बिहार में UCC को लेकर पार्टी की स्थिति अलग है। ऐसे में संजय झा की भूमिका इस पूरे विवाद में काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इससे पहले बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर भी संजय झा की रणनीति चर्चा में रही। रिपोर्ट के मुताबिक, जेडीयू की कोशिश थी कि सभापति का पद भाजपा से लेकर पार्टी के खाते में आए। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप के बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और भाजपा के अवधेश नारायण सिंह इस पद पर बने रहे।
यह घटनाक्रम बताता है कि NDA के भीतर सत्ता और संस्थागत पदों को लेकर सहयोगी दलों के बीच लगातार बातचीत और रणनीतिक खींचतान चल रही है।
संजय झा के बढ़ते कद पर नजर
संजय झा इस समय जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है। ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर फैसलों और केंद्र-राज्य के बीच समन्वय में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
हालिया दिनों में उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में संभावित जगह मिलने की अटकलों से भी जोड़ा गया है। हालांकि यह अभी राजनीतिक अटकल है और इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
फरक्का से लेकर UCC तक बिहार के मुद्दे उठा रहे झा
संजय झा ने बिहार के हितों से जुड़े मुद्दों को भी आक्रामक तरीके से उठाया है। फरक्का जलसंधि को लेकर जेडीयू के अभियान में उनकी भूमिका प्रमुख रही है। पार्टी दिसंबर 2026 में संधि की अवधि समाप्त होने से पहले इस मुद्दे को बिहार की राजनीति में जोर-शोर से उठाना चाहती है।
ऐसे में UCC, फरक्का और NDA के अंदर पदों के समीकरण—इन तीनों मोर्चों पर संजय झा की सक्रियता को बिहार की बदलती राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सहयोगियों की धड़कनें क्यों बढ़ीं?
संजय झा के लगातार सक्रिय रहने से NDA के सहयोगी दलों के सामने सबसे बड़ा सवाल गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का है। हालांकि अभी किसी बड़े टूट या गठबंधन संकट का आधिकारिक संकेत नहीं है, लेकिन अलग-अलग मुद्दों पर JDU का स्वतंत्र रुख यह जरूर दिखाता है कि पार्टी बिहार के राजनीतिक हितों को लेकर अपनी शर्तों और प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रख रही है।
यही वजह है कि संजय झा के हर नए बयान और राजनीतिक कदम पर भाजपा समेत NDA के दूसरे सहयोगियों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में UCC और बिहार के अन्य मुद्दों पर जेडीयू का रुख राज्य की राजनीति को और गरमा सकता है।