पटना, 15 सितंबर 2026। बिहार में जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने की योजना की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राज्य के जिला अस्पतालों में 75 तरह की सर्जरी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन फिलहाल केवल 45 प्रकार की सर्जरी ही हो पा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब इस अंतर को कम करने और अस्पतालों की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए समीक्षा शुरू कर दी है।
जिला अस्पतालों में अटकीं ये जरूरी सर्जरियां
- वर्तमान में जारी सर्जरियां: जिला अस्पतालों में फिलहाल केवल जनरल सर्जरी, हड्डी रोग, सी-सेक्शन प्रसव और महिलाओं से जुड़ी सामान्य सर्जरी ही हो पा रही हैं।
- अधूरी सुविधाएं: आईपीएचएस (IPHS) मानकों के तहत अनिवार्य कई अति-आवश्यक सर्जरियों की सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
- आपातकालीन ट्रमा केयर ठप: हादसों से जुड़ी ट्रॉमा/इमरजेंसी सर्जरी और प्रसव से जुड़ी जटिल शल्य-चिकित्सा की व्यवस्था न के बराबर है।
- आंख और हड्डी के ऑपरेशन लंबित: जोड़ों के विस्थापन, दुर्घटना से संबंधित गंभीर हड्डी रोग, मोतियाबिंद और आंख की गंभीर चोटों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
75 सर्जरी का लक्ष्य, 45 तक ही पहुंची व्यवस्था
सरकार की योजना के तहत जिला अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा से ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य यह है कि गंभीर या ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों को हर बार पटना या बड़े मेडिकल संस्थानों की ओर रेफर न करना पड़े।
हालांकि, मौजूदा स्थिति में 75 निर्धारित सर्जरी में से करीब 45 प्रकार की सर्जरी ही जिला अस्पतालों में हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब बाकी ऑपरेशनों को शुरू कराने की चुनौती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक इस लक्ष्य को पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों की जरूरत होती है। डॉक्टरों की उपलब्धता के साथ ऑपरेशन थिएटर, जांच सुविधाएं और जरूरी मेडिकल संसाधन भी पर्याप्त होने चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग अब इन कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
निशांत कुमार ने बुलाई सिविल सर्जनों की बैठक
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने स्थिति की समीक्षा के लिए 16 सितंबर को सभी सिविल सर्जनों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में जिला अस्पतालों में चल रही सर्जरी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और अस्पतालों की मौजूदा व्यवस्था पर चर्चा होने की संभावना है।
इस बैठक में यह भी देखा जा सकता है कि किन जिलों में निर्धारित सर्जरी हो रही हैं और किन अस्पतालों में सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
बिहार सरकार ने जून में घोषणा की थी कि राज्य के सभी जिला अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार ने डॉक्टरों की उपस्थिति की निगरानी के लिए बड़ी संख्या में सरकारी अस्पतालों में CCTV व्यवस्था और कमांड सेंटर से निगरानी की योजना भी बताई थी।
अब 75 की जगह 45 प्रकार की सर्जरी होने का आंकड़ा इस योजना की जमीनी प्रगति पर ध्यान खींच रहा है। आने वाली समीक्षा बैठक में सरकार यह तय कर सकती है कि बाकी सुविधाओं को किस तरह और कितनी तेजी से शुरू किया जाए।
मरीजों को रेफरल से मिलेगी राहत?
स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि जिला अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा इलाज और सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो, ताकि मरीजों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूसरे शहरों में न जाना पड़े। निशांत कुमार पहले भी अस्पतालों में मरीजों को बिना प्राथमिक जांच के रेफर किए जाने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दे चुके हैं।
अब निगाहें 16 सितंबर की बैठक पर हैं। इसमें जिला अस्पतालों की वास्तविक स्थिति और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को लेकर आगे की रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है।