ड्रोन हमले से सऊदी में मचा हड़कंप, ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद

0

रियाद, 12 सितंबर 2026। सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। रियाद के मुताबिक, कई ड्रोन इराक से आए थे और हमले में पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के साथ कुछ लोग घायल भी हुए हैं। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने सुरक्षा के मद्देनजर पाइपलाइन को बंद करने का फैसला लिया है।

ईरान जंग के चलते होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी इसी पाइपलाइन से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था।

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पाइपलाइन पर गुरुवार को कई हमले हुए थे। मंत्रालय की टीमें पाइपलाइन को सुरक्षित करने और नुकसान का पता लगाने में जुटी हैं।

फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये हमले किसने किए। अब तक किसी भी देश या संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले के पीछे किसका हाथ?

सऊदी और इराकी अधिकारियों के अनुसार, हमला इराक से आया। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि ईरान को हमले के लिए संभावित रूप से जिम्मेदार बताया है। सऊदी अरब ने फिलहाल तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है और इराक के आग्रह पर मामले को संभालने का मौका दिया है।

होर्मुज संकट के बीच दूसरा बड़ा झटका

सऊदी के लिए यह हमला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से ही तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन इसी समस्या से बचने के लिए एक वैकल्पिक निर्यात मार्ग प्रदान करती है। अब इस पाइपलाइन के बंद होने से सऊदी के तेल निर्यात के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

कच्चे तेल की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव

पाइपलाइन बंद होने की खबर ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पहले ही भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित है। रिपोर्टों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। यदि सऊदी की वैकल्पिक तेल आपूर्ति व्यवस्था भी लंबे समय तक बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

भारत समेत कई देशों पर असर की आशंका

तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। भारत जैसे बड़े कच्चे तेल आयातक देशों के लिए महंगा क्रूड आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पाइपलाइन कितने समय तक बंद रहती है और वैश्विक बाजार में वैकल्पिक आपूर्ति कितनी उपलब्ध रहती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.