बठिंडा , 08 सितंबर2026 । पंजाब में बिजली संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। राज्य में बिजली की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि सरकारी थर्मल प्लांटों की कई यूनिट बंद होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी थर्मल प्लांटों की 10 में से पांच यूनिट गैर-चालू रहने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। इसी बीच राज्य में बिजली की मांग करीब 16 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
पंजाब में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 2 सितम्बर को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 16,343 मैगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए सरकार को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ी और एक ही दिन में करीब 119.5 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी गई। थर्मल प्लांटों के 5 यूनिट बंद रहने का सीधा असर औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है। लुधियाना, खन्ना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक केंद्रों में करीब साढ़े 4 घंटे तक बिजली कट लगाने पड़े, जिससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
थर्मल प्लांटों की यूनिट बंद, उत्पादन पर असर
बिजली संकट के पीछे थर्मल प्लांटों की बंद यूनिटों को बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक रोपड़ के गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट और लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट की यूनिटों में तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। वहीं निजी क्षेत्र के राजपुरा थर्मल प्लांट पर कोयले की उपलब्धता का असर पड़ा है और प्लांट अपनी पूरी क्षमता से कम पर चल रहा है।
इसका सीधा असर राज्य के बिजली उत्पादन पर पड़ा है। सोमवार को पंजाब का कुल बिजली उत्पादन करीब 4,585 मेगावाट तक दर्ज किया गया, जबकि मांग लगभग 15,983 मेगावाट रही। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को पूरा करने के लिए राज्य को ग्रिड से अतिरिक्त बिजली लेनी पड़ रही है।
उद्योगों पर भी बिजली कटौती का असर
बिजली की कमी का असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ा है। लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, जालंधर और मोहाली जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में चार घंटे या उससे अधिक की कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होने और उद्योगों की लागत बढ़ने की चिंता पैदा हुई है।
हालांकि लुधियाना के उद्योगों के लिए लगाया गया पांच घंटे का रात का बिजली कट बाद में वापस ले लिया गया। PSPCL के मुताबिक तलवंडी साबो ग्रिड से जुड़ी आपूर्ति समस्या ठीक होने के बाद उद्योगों को शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक नियमित बिजली देने का फैसला किया गया।
कोयले की कमी या तकनीकी खराबी?
पंजाब के बिजली संकट को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। एक तरफ कुछ रिपोर्टों में निजी थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी को उत्पादन प्रभावित होने की प्रमुख वजह बताया गया है। दूसरी तरफ पंजाब बीजेपी ने दावा किया है कि राज्य में कोयले का स्टॉक पर्याप्त होने के बावजूद पांच उत्पादन यूनिट लंबे समय से बंद हैं। पार्टी ने सरकार से प्रत्येक प्लांट की उत्पादन क्षमता, कोयला स्टॉक और यूनिट बंद होने के कारणों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
बढ़ती मांग ने बढ़ाई चुनौती
कमजोर मानसून के कारण धान की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। इससे कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी। 2 सितंबर को पंजाब की पीक बिजली मांग 16,343 मेगावाट तक पहुंच गई थी, जो पिछले साल की समान तारीख की तुलना में काफी अधिक थी। बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए राज्य को एक ही दिन बड़ी मात्रा में बिजली खरीदनी पड़ी।
फिलहाल बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बंद यूनिटों को जल्द से जल्द चालू करना और बढ़ती मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है। अगर तकनीकी खराबियों और कोयले से जुड़ी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ उद्योग और कृषि क्षेत्र पर भी बिजली कटौती का दबाव बढ़ सकता है।