जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कांग्रेस का हमला, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उठाए सवाल
अयोध्या, 03 सितंबर2026 । ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम के बीच जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने नियुक्ति के समय और परिस्थितियों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि कहीं इसके पीछे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा कोई ऐसा पहलू तो नहीं है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। कांग्रेस के इस बयान के बाद नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी कहते हैं- मौजूदा बीजेपी सरकार सुप्रीम कोर्ट के जजों को गवर्नर या राज्यसभा का सदस्य बना रही है। इससे लोगों के मन में शक पैदा होता है। अब आपने एक रिटायर्ड एयर चीफ को राम मंदिर ट्रस्ट का CEO बना दिया है। उनका इससे क्या लेना-देना है? मुझे हैरानी है कि क्या ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पीछे कोई छिपी हुई सच्चाई है, जिसकी वजह से उन्हें यहां CEO बनाया गया। बीजेपी सरकार और हमारे प्रधानमंत्री की यह नीति देश को बर्बाद कर देगी। आज तक राम मंदिर में डकैती करने वालों की पहचान उजागर नहीं हुई है और न ही सभी दोषियों को गिरफ्तार किया गया है।
कांग्रेस की ओर से जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ दिया गया। पार्टी का कहना है कि नियुक्ति को लेकर सामने आए घटनाक्रम की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए सवाल और आशंकाएं राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें किसी निष्कर्ष या प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में चर्चा में रहा है। इस अभियान के बाद सैन्य कार्रवाई, खुफिया सूचनाओं और उससे जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच कई मुद्दों पर बयानबाजी हुई। अब जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को भी कांग्रेस ने इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस के हमले के केंद्र में नियुक्ति की प्रक्रिया और उसके पीछे संभावित कारण हैं। पार्टी यह जानना चाहती है कि नियुक्ति किन आधारों पर हुई और क्या इससे जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक किए गए हैं। विपक्ष की ओर से ऐसे सवाल उठना सरकार पर पारदर्शिता को लेकर दबाव बढ़ा सकता है, खासकर जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियान जैसे संवेदनशील विषय से जोड़ा जा रहा हो।
वहीं, नियुक्ति को लेकर सरकार या संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण रहेगा। यदि नियुक्ति के लिए स्पष्ट प्रशासनिक या पेशेवर आधार मौजूद हैं, तो उस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण कांग्रेस के आरोपों का जवाब दे सकता है। ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी दावे की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और जांच से ही संभव होती है।
इस विवाद ने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े फैसलों और उसके बाद हुए प्रशासनिक घटनाक्रम को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस के सवालों के बाद अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित संस्थाएं जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर क्या स्पष्टीकरण देती हैं और क्या नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज या कारण सार्वजनिक किए जाते हैं।
फिलहाल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के आरोपों ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर का नाम सामने आने से विवाद का दायरा भी बढ़ गया है। हालांकि, नियुक्ति और ऑपरेशन सिंदूर के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी और ठोस साक्ष्यों का सामने आना जरूरी होगा।