आरक्षण पर चिराग-मांझी के बीच सियासत तेज, ‘सेकंड’ पासवान की एंट्री से बढ़ी हलचल

बोले- नेताओं ने सिर्फ परिवार का विकास किया

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पटना, 01 सितंबर2026 । बिहार में आरक्षण के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच अब ‘सेकंड’ पासवान की एंट्री ने मामले को और गरमा दिया है। उन्होंने दोनों नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने समाज के व्यापक हित के बजाय केवल अपने परिवार के विकास पर ध्यान दिया।

‘आरक्षण पर बयान देकर दलित नेता बनने की होड़’

मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन उर्फ लखेन्द्र पासवान ने आरोप लगाया कि कुछ नेता सिर्फ आरक्षण का मुद्दा उछालकर दलित समाज के बड़े नेता बनने की फिराक में रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के रहते हुए देश में आरक्षण पूरी तरह सुरक्षित है और इस पर राजनीति करना महज दिखावा है। निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी और चिराग पासवान ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल सिर्फ अपने परिवार के विकास के लिए किया है। उन्होंने दोनों नेताओं से सार्वजनिक रूप से ये स्पष्ट करने को कहा कि क्या वे कभी अपना पारिवारिक मोह त्यागने की हिम्मत दिखा पाएंगे?

आरक्षण का मुद्दा बिहार की राजनीति में लंबे समय से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण रहा है। चुनावी माहौल में इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के रुख के कारण सियासी समीकरण लगातार बदलते रहे हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की राजनीति का बड़ा आधार भी सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दे रहे हैं।

इसी बीच ‘सेकंड’ पासवान के बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने दोनों नेताओं के राजनीतिक योगदान और उनके परिवारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अपनी बात रखी। उनके आरोपों ने आरक्षण की राजनीति के साथ-साथ नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।

मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि आरक्षण को लेकर अलग-अलग सामाजिक समूहों की अपेक्षाएं और राजनीतिक दलों की रणनीति क्या है। बिहार में चुनावी समीकरणों के बीच आरक्षण से जुड़ा कोई भी बयान सीधे तौर पर राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है। यही वजह है कि नेताओं के बयानों पर पार्टियों और समर्थक समूहों की नजर बनी हुई है।

अब देखना होगा कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आरक्षण के मुद्दे पर आगे उनकी रणनीति क्या रहती है। ‘सेकंड’ पासवान की एंट्री के बाद बिहार की आरक्षण राजनीति में नई बयानबाजी और सियासी टकराव देखने को मिल सकता है।

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