गाजियाबाद में टेलर की पत्नी के PAN से 17 करोड़ का कारोबार
बिना जानकारी इस्तेमाल हुआ पैन, FIR दर्ज होने से मचा हड़कंप
गाजियाबाद , 01 सितंबर2026 । गाजियाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक टेलर की पत्नी के PAN कार्ड का इस्तेमाल करीब 17 करोड़ रुपये के कारोबार के लिए किए जाने का आरोप है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पीड़िता की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। इस घटना ने PAN कार्ड और व्यक्तिगत दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब पीड़ित के मोबाइल पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से बार-बार मेसेज आने लगे, तो उसने सीए से मामले की पड़ताल कराई। इसके बाद उसे जालसाजी का पता चला। पीड़ित पति ने चार माह पूर्व मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर रविंद्र गौड़ से की थी। 30 अगस्त को केस दर्ज कर मामले की जांच में पुलिस जुट गई है।
पैन कार्ड नंबर का हुआ दुरुपयोग
जवाहर पार्क निवासी हुकम सिंह ने बताया कि वह टेलर हैं और उनकी पत्नी किरण हाउस वाइफ हैं। वह 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह कमाते हैं। चार माह पहले पता चला कि उनकी पत्नी के पैन कार्ड नंबर का दुरुपयोग हुआ है। आरोपियों ने पैन कार्ड से एक अनधिकृत जीएसटी पंजीकरण कराया। इससे लगभग 16 करोड़ 80 लाख का कारोबार किया गया। उन्होंने कहा कि इस जालसाजी में मनोरमा माहेश्वरी नामक व्यक्ति की संलिप्तता की आशंका है, जिसका पैन और जीएसटी नंबर संग उनकी पत्नी के पैन नंबर के साथ व्यापार हुआ है।
बताया जा रहा है कि महिला के PAN से जुड़े रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर कारोबारी लेनदेन दर्ज हुए, जबकि परिवार का दावा है कि उन्हें इस कारोबार की कोई जानकारी नहीं थी। महिला के पति के टेलर का काम करने की बात सामने आई है। इतने बड़े कारोबार से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद परिवार को कथित फर्जीवाड़े का पता चला।
मामले में अब पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच का प्रमुख बिंदु यह होगा कि महिला के PAN विवरण का इस्तेमाल किसने किया, किस उद्देश्य से किया गया और उसके नाम पर दर्ज कारोबारी गतिविधियों के पीछे कौन लोग शामिल हैं। पुलिस दस्तावेजों, कारोबारी रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर सकती है।
यह मामला आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण चेतावनी है। PAN कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी गलत हाथों में जाने पर व्यक्ति के नाम पर अनधिकृत वित्तीय गतिविधियां की जा सकती हैं। इसलिए लोगों को समय-समय पर अपने PAN से जुड़े वित्तीय और आयकर रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए।
अब पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि करीब 17 करोड़ रुपये के कथित कारोबार के पीछे पूरा नेटवर्क क्या था और पीड़िता के PAN का इस्तेमाल कैसे किया गया। FIR दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।