जयंत चौधरी के 25 पुराने वीडियो से सपा करेगी हमला

‘चवन्नी’ विवाद के बीच बढ़ेगा सियासी संग्राम

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लखनऊ, 26 अगस्त 2026 ।  उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है। ‘चवन्नी’ वाले बयान के बाद अब सपा ने रालोद प्रमुख जयंत चौधरी को घेरने के लिए उनके पुराने बयानों और वीडियो को हथियार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सपा ने जयंत चौधरी के पिछले करीब 25 वर्षों के 25 पुराने वीडियो जुटाए हैं, जिन्हें सोशल मीडिया अभियान के जरिए सामने लाने की तैयारी है।

2020 में हाथरस में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से लेकर 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा था कि जाट समुदाय किस प्रकार वोट करेगा इसका ठेका लिया है। इस बयान से जुड़े 25 वीडियो सपा के रणनीतिकारों ने निकाल लिए हैं। सपा के लिए ये वीडियो अहम हथियार साबित हो सकता है।

दरअसल, विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने पुराने गठबंधन सहयोगियों के संदर्भ में ‘चवन्नी को रुपया’ बनाने वाला तंज कसा था। इस टिप्पणी को जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया। जयंत ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर सस्ते शब्द बोलने थे तो सीधे उनका नाम लिया जाता।

इसके बाद मामला सिर्फ अखिलेश और जयंत की व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। जाट समुदाय के सम्मान को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बीजेपी नेताओं ने भी अखिलेश के बयान पर निशाना साधते हुए इसे जाट समाज के अपमान से जोड़ा।

अब सपा द्वारा पुराने वीडियो सामने लाने की रणनीति से विवाद के और बढ़ने के संकेत हैं। इन वीडियो के जरिए जयंत चौधरी के पुराने बयानों और राजनीतिक रुख को लेकर सवाल खड़े किए जाने की तैयारी बताई जा रही है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस सोशल मीडिया अभियान में बीजेपी की ओर से भी मदद मिल रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश इस सियासी टकराव का प्रमुख केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सहारनपुर समेत पश्चिमी यूपी में सपा और रालोद दोनों अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में ‘चवन्नी विवाद’ अब चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों से भी जुड़ता नजर आ रहा है।

आने वाले दिनों में अगर पुराने वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रचारित किए जाते हैं तो अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच सियासी टकराव और तेज हो सकता है। पश्चिमी यूपी में जाट, किसान और अन्य सामाजिक समूहों के बीच इस विवाद का राजनीतिक असर कितना पड़ता है, यह चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण होगा।

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