डायलिसिस से जूझ रहे पति को पत्नी ने दी जिंदगी, अपनी किडनी देकर निभाया साथ
बोलीं- ‘पति से बड़ा किडनी का कोई मोल नहीं’
आगरा, 26 अगस्त 2026 । आगरा में एक पत्नी ने अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी दान कर मिसाल पेश की है। सिकंदराराऊ निवासी मीना कुशवाहा ने लंबे समय से डायलिसिस करा रहे अपने पति महेंद्र कुशवाहा के लिए बिना किसी हिचकिचाहट के किडनी देने का फैसला किया। एसएन मेडिकल कॉलेज में 22 अगस्त को सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।
हाथरस के सिकंदराराऊ निवासी 32 वर्षीय महेंद्र कुशवाहा एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं। करीब डेढ़ साल पहले उन्हें दोनों किडनियां खराब होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद से उनकी जिंदगी डायलिसिस के सहारे चल रही थी। लगातार डायलिसिस से उनका शरीर कमजोर होता जा रहा था। इलाज के लिए पत्नी मीना ही उन्हें लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज आती थीं।
महेंद्र की दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं और वह करीब डेढ़ साल से डायलिसिस पर थे। उनकी हालत लगातार कमजोर होती जा रही थी। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट को उनकी जान बचाने का महत्वपूर्ण विकल्प बताया। इसके बाद मीना ने खुद किडनी दान करने की इच्छा जताई और चिकित्सकीय जांच में भी वह उपयुक्त पाई गईं।
तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के साथ मीना अपने पति को नियमित रूप से डायलिसिस के लिए अस्पताल भी लेकर जाती थीं। निजी अस्पताल में ट्रांसप्लांट का खर्च अधिक होने के कारण परिवार के सामने आर्थिक चुनौती भी थी। इसी बीच एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने से परिवार को उम्मीद मिली।
किडनी दान करने के फैसले पर मीना ने कहा कि पति से बड़ा किडनी का कोई मोल नहीं है और उनकी जिंदगी की डोर पति से जुड़ी है। परिवार ने भी उनके इस फैसले की सराहना की। महेंद्र के पिता ने बहू को ‘देवी’ बताते हुए कहा कि उसने उनके बेटे को नया जीवन दिया।
यह ट्रांसप्लांट एसएन मेडिकल कॉलेज के लिए भी खास उपलब्धि है, क्योंकि महेंद्र वहां किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले पहले मरीज बने। डॉक्टरों के अनुसार सफल सर्जरी के बाद उनकी हालत ठीक है और दोनों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।