पटना, 22 अगस्त 2026 । बिहार की सियासत में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सक्रियता अचानक बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में वह लगातार सरकार को घेरने, आंदोलनों में पहुंचने और जन मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाने में जुटे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे सिर्फ विपक्षी राजनीति की सामान्य सक्रियता नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव की चुनौती से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पारिवारिक दूरिया खत्म कर मजबूत हो रहे हैं तेजस्वी
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब यह समझने लगे हैं कि उनके समर्थक पारिवारिक मतभिन्नता नहीं चाहते हैं। तेजस्वी यादव ने इस और कदम बढ़ाया भी। बिहार बंद और नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के दौरान तेज प्रताप भी उनके साथ हो लिए। सम्राट सरकार ने तेजप्रताप को प्रदर्शनकारियों को उकसाने और हिंसा के आरोप में 25 जुलाई 2026 की रात पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया बाद में अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया। तब तेजस्वी यादव का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने सम्राट सरकार को चेतावनी दी कि कल तक मेरे भाई तेजस्वी यादव और गिरफ्तार किए गए कई छात्रों को आरोप मुक्त कर नहीं छोड़ा गया तो बड़े आंदोलन झेलने को सरकार तैयार रहे। और जब तेजस्वी यादव ने सिवान एके 47 मामले में जब लोकभवन मार्च निकाला तो सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया तो बड़े भाई तेजप्रताप ने सरकार से तेजस्वी को छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी भी दी कि नहीं छोड़ा तो सरकार बड़ा आंदोलन झेलने को तैयार रहे।
प्रशांत किशोर ने बढ़ाई तेजस्वी की टेंशन
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद बिहार विधानसभा में एक नया विपक्षी चेहरा उभरा है। उनकी एंट्री ऐसे समय हुई है जब आरजेडी पहले से ही विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत होने के बावजूद अपने राजनीतिक आधार और नेतृत्व को लेकर सवालों का सामना कर रही है। बांकीपुर के नतीजों को तेजस्वी यादव के लिए खास तौर पर चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर का फोकस युवाओं, रोजगार, शिक्षा और शासन जैसे मुद्दों पर है। यही वे विषय हैं जिन पर तेजस्वी भी लंबे समय से सरकार को घेरते रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच मुद्दों और विपक्षी स्पेस को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना देखी जा रही है।
सड़क पर उतरकर सरकार को घेर रहे तेजस्वी
तेजस्वी यादव हाल में छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे। उन्होंने सरकार पर रोजगार, नियुक्तियों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर निशाना साधा और आंदोलनरत छात्रों की मांगों का समर्थन किया। इसके अलावा आरजेडी ने सरकार के खिलाफ लोकभवन मार्च भी किया।
तेजस्वी की यह आक्रामकता ऐसे समय सामने आई है जब बिहार में विपक्षी राजनीति के स्वरूप को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं। आरजेडी के अकेले आंदोलन करने के फैसले ने महागठबंधन के भीतर भी राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
क्या विपक्ष की राजनीति में स्पेस बचाने की कोशिश?
राजनीतिक विश्लेषण में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या तेजस्वी यादव अब विपक्ष की राजनीति में अपनी जगह और नेतृत्व की दावेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। प्रशांत किशोर की विधानसभा में एंट्री के बाद उनके सामने चुनौती सिर्फ सत्ता पक्ष की नहीं, बल्कि विपक्ष के भीतर उभर रहे नए विकल्प की भी है।
हालिया गतिविधियों को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, तेजस्वी की सक्रियता को केवल प्रशांत किशोर के दबाव का नतीजा मानना राजनीतिक आकलन है; इसके पीछे सरकार के खिलाफ मुद्दों को लेकर आरजेडी की अपनी रणनीति भी हो सकती है।