बवाना गैस पावर प्लांट से बिजली खरीदना हुआ महंगा, 9 साल में 70% तक बढ़ी बिजली की दर

0

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 । दिल्ली के बवाना स्थित गैस आधारित पावर प्लांट से बिजली खरीदना पिछले कुछ वर्षों में लगातार महंगा हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पावर प्लांट से बिजली खरीदने की दर में करीब 9 साल के दौरान लगभग 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर बिजली खरीद की लागत और दिल्ली की बिजली व्यवस्था के आर्थिक बोझ पर पड़ने की चिंता बढ़ा रहा है।

गैस से बिजली महंगी, गर्मियों में बढ़ता है खर्च

दिल्ली के गैस आधारित पावर प्लांट पीक डिमांड के समय अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन गैस की कीमत और उपलब्धता के कारण इनसे बिजली बनाना महंगा पड़ता है। DERC के रिकॉर्ड में भी बवाना समेत गैस आधारित प्लांटों की कम लागत-प्रभावशीलता और गैस उपलब्धता से जुड़ी दिक्कतों का उल्लेख किया गया है। 2026 में भी बवाना प्लांट से अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत करीब 9.20 रुपये प्रति यूनिट बताई गई थी।

बवाना पावर प्लांट दिल्ली की बिजली जरूरतों को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों में शामिल है। हालांकि, गैस की कीमतों और बिजली उत्पादन की लागत में बदलाव के चलते यहां से मिलने वाली बिजली पहले की तुलना में महंगी साबित हो रही है। बिजली खरीद दर में इतनी बड़ी वृद्धि ने गैस आधारित बिजली उत्पादन की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

गैस की कीमत बिजली उत्पादन की कुल लागत को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। जब ईंधन की कीमत बढ़ती है तो पावर प्लांट की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। बवाना प्लांट से बिजली खरीद की दर में लगातार हुई वृद्धि को इसी व्यापक लागत दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा संचालन, रखरखाव और अन्य लागतों का भी बिजली की अंतिम कीमत पर प्रभाव पड़ सकता है।

बवाना से महंगी बिजली खरीद का मुद्दा दिल्ली की बिजली आपूर्ति व्यवस्था के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। गर्मियों में पीक डिमांड के दौरान पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसे में महंगे गैस आधारित उत्पादन पर निर्भरता बढ़ने से कुल बिजली खरीद लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इस स्थिति ने दिल्ली की ऊर्जा नीति में सस्ती और भरोसेमंद बिजली के स्रोतों को बढ़ावा देने की जरूरत को भी रेखांकित किया है। नवीकरणीय ऊर्जा, लंबी अवधि के पावर खरीद समझौते और अन्य प्रतिस्पर्धी स्रोतों से बिजली खरीद जैसे विकल्पों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, गैस आधारित संयंत्रों की अपनी भूमिका है, खासकर जब बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है और तत्काल आपूर्ति की जरूरत होती है।

अब बड़ा सवाल यह है कि बवाना पावर प्लांट से बढ़ती बिजली खरीद लागत का असर अंततः किस तरह दिल्ली की बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। आने वाले समय में बिजली की मांग, गैस की कीमत और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता इस लागत को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.