नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 । भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचादबैंक (Oschadbank) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। यह मामला रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेनी बैंक की संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को हुए कथित नुकसान से जुड़ा है। विवाद की सुनवाई तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल करेगा।
1998 की निवेश संधि से जुड़ा है विवाद
यह मामला रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुई द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत चल रही आर्बिट्रेशन कार्यवाही से संबंधित है। ओशचादबैंक ने डोनेत्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियों और कारोबार को हुए नुकसान का दावा किया है। बैंक का आरोप है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण उसे इन संपत्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों का नुकसान उठाना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार, बैंक का दावा सैकड़ों मिलियन डॉलर का है। विवाद की प्रक्रिया जुलाई 2025 में रूस को भेजे गए नोटिस के बाद आगे बढ़ी।
रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओश्चादबैंक से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला यूक्रेन और रूस के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है।
ओश्चादबैंक का कहना है कि 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले की वजह से उसे दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियां और कारोबार गंवाना पड़ा।
इन इलाकों में ओश्चादबैंक की बैंक शाखाएं, ATM, दफ्तर, जमीन, और दूसरे कारोबारी संसाधन थे। रूस के कब्जे के बाद बैंक इन संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सका। कई शाखाएं बंद हो गईं और बैंक का कारोबार ठप पड़ गया।
अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंच पर अहम भूमिका
पूर्व CJI चंद्रचूड़ का लंबा न्यायिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी समझ इस नियुक्ति को खास बनाती है। आर्बिट्रेशन में दोनों पक्ष अपने-अपने नामित सदस्यों के जरिए ट्रिब्यूनल का गठन करते हैं, जबकि अंतिम निर्णय ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया के अनुसार लिया जाता है।
अब इस मामले में ओशचादबैंक के दावों, रूस-यूक्रेन निवेश संधि की शर्तों और कथित संपत्ति नुकसान से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।