दिल्ली होटल अग्निकांड: कुक को मिली जमानत का हवाला देकर अकाउंटेंट ने मांगी राहत, कोर्ट ने याचिका खारिज की

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नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 । दिल्ली के चर्चित होटल अग्निकांड मामले में अदालत ने आरोपी अकाउंटेंट को राहत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी ने मामले में पहले से जमानत पा चुके कुक का हवाला देते हुए अपने लिए भी समान आधार पर राहत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दोनों आरोपियों की भूमिका और मामले की परिस्थितियों में अंतर को देखते हुए अकाउंटेंट की जमानत याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने कहा कि केसर नेगी को जमानत देते समय यह तथ्य सामने आया था कि वह होटल में कुक के तौर पर काम करते थे। ऐसा कोई ठोस मटेरियल उनके खिलाफ नहीं था, जिससे यह पता चले कि बिल्डिंग के स्ट्रक्चर, एलपीजी सिस्टम, फायर सेफ्टी, बिजली की वायरिंग, लाइसेंस, फायर एनओसी, इमरजेंसी एग्जिट, स्प्रिंकलर या फायर अलार्म जैसी व्यवस्थाओं में उनकी कोई जिम्मेदारी थी। दूसरी तरफ, जय का नाम B&B लाइसेंस में दर्ज था और लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका रही।

कुक की जमानत को बनाया था आधार

अकाउंटेंट की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इसी मामले में आरोपी एक कुक को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए समानता के आधार यानी पैरिटी के तहत उसे भी जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि केवल किसी सह-आरोपी को जमानत मिलने के आधार पर दूसरे आरोपी को स्वतः राहत नहीं दी जा सकती। प्रत्येक आरोपी की भूमिका, जिम्मेदारी और उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग आकलन जरूरी है।

अदालत ने भूमिका में अंतर को माना अहम

कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और आरोपों पर विचार करते हुए अकाउंटेंट की भूमिका को कुक के समान नहीं माना। जमानत के सवाल पर अदालत ने इस बात को महत्वपूर्ण माना कि दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपों की प्रकृति और कथित भूमिका अलग हो सकती है।

ऐसे में केवल कुक को मिली जमानत को आधार बनाकर अकाउंटेंट को भी राहत देना उचित नहीं माना गया

पैरिटी के आधार पर जमानत का मतलब क्या?

कानूनी तौर पर पैरिटी का सिद्धांत यह नहीं कहता कि एक आरोपी को मिली जमानत के बाद हर सह-आरोपी को स्वतः जमानत मिल जाएगी। अदालत आरोपी की भूमिका, आरोपों की गंभीरता, साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों को देखकर निर्णय लेती है।

इसी वजह से इस मामले में कुक को मिली राहत के बावजूद अकाउंटेंट को जमानत देने से अदालत ने इनकार कर दिया।

कोर्ट के फैसले से क्या स्पष्ट हुआ?

इस आदेश से स्पष्ट है कि सह-आरोपी की जमानत को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने के लिए आरोपी को यह दिखाना जरूरी होता है कि उसकी भूमिका और परिस्थितियां भी उस आरोपी के समान हैं। केवल यह तथ्य कि दोनों एक ही मामले में आरोपी हैं, जमानत के लिए पर्याप्त नहीं है।

फिलहाल अकाउंटेंट की याचिका खारिज होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

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