सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य: फेसबुक-इंस्टाग्राम के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं की मेंटल हेल्थ पर चिंता

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नई दिल्ली, 07 अगस्त 2026 । फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग को लेकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर एक बार फिर चिंता जताई गई है। हालिया अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स का अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल कुछ युवाओं में तनाव, चिंता, अवसाद, आत्मसम्मान में कमी, अकेलेपन की भावना और नींद से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता और यह इस बात पर निर्भर करता है कि सोशल मीडिया का उपयोग कैसे और कितनी मात्रा में किया जा रहा है।

अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की अदालत ने गुरुवार को इंस्टाग्राम-फेसबुक की पेरेंट कंपनी Meta पर 942 मिलियन डॉलर यानी 9030 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि प्लेटफॉर्म से युवाओं की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा।

जुर्माने की रकम में से 420 मिलियन डॉलर यानी 3993 करोड़ रुपए युवाओं के इलाज पर खर्च होंगे। बाकी की रकम अगले 5 साल में अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी।

दो फेज में केस चला

यह केस दो फेज में चला। पहले फेज में कोर्ट ने Meta पर 375 मिलियन डॉलर यानी 3571 करोड़ रुपए के सिविल जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि कंपनी जानती थी कि प्लेटफॉर्म पर बच्चों का यौन शोषण हुआ, लेकिन इसे छिपाया।

दूसरे फेज में कोर्ट ने Meta पर 567 मिलियन डॉलर यानी 5,390 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। इस तरह अदालत ने कंपनी पर कुल 942 मिलियन डॉलर यानी 9030 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया।

केस के दौरान प्रॉसिक्यूटर्स ने जज से Meta में बुनियादी बदलाव करने की मांग की थी। इन बदलावों का मकसद लत लगाने वाले फीचर्स पर रोक लगाना, एज वैरिफिकेशन प्रोसेस को बेहतर बनाना और डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स, कड़ी निगरानी के जरिए बच्चों के यौन शोषण को रोकना था।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार दूसरों की उपलब्धियों, जीवनशैली और तस्वीरों से अपनी तुलना करना कई युवाओं में हीन भावना और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है। वहीं, लगातार नोटिफिकेशन, लाइक्स और ऑनलाइन सक्रिय रहने का दबाव भी मानसिक थकान बढ़ा सकता है। देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग करने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिसका असर पढ़ाई, काम और दैनिक जीवन पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सोशल मीडिया के कई सकारात्मक पहलू भी हैं। यह लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने, जानकारी प्राप्त करने, सीखने, रचनात्मकता दिखाने और सहायता समूहों तक पहुंच बनाने का अवसर देता है। इसलिए समस्या केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि उसका असंतुलित या अत्यधिक उपयोग हो सकता है।

विशेषज्ञ युवाओं और अभिभावकों को सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया के उपयोग के लिए समय सीमा तय करें, स्क्रीन टाइम पर नजर रखें, पर्याप्त नींद लें, नियमित शारीरिक गतिविधियों में भाग लें और वास्तविक सामाजिक संबंधों को भी समय दें। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक उदासी, चिंता, तनाव या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण महसूस हों, तो योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके उपयोग में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। जागरूकता, डिजिटल अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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