असम बाढ़ पीड़ितों के लिए सलमान खान की बड़ी पहल

500 घर बनवाने का ऐलान, राहत और पुनर्वास को मिलेगा सहारा

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नई दिल्ली, 07 अगस्त 2026 । बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने असम में बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए बड़ी मानवीय पहल की है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए 500 घरों के निर्माण में सहयोग देने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, जिनके घर बाढ़ के कारण पूरी तरह या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

सलमान की संस्था बीइंग ह्यूमन इससे पहले भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जरूरतमंदों तक भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने में सहयोग कर चुकी है। अब राहत अभियान के दूसरे चरण में प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर फोकस किया जा रहा है।

अब तक 220 सेमी-पर्मानेंट घर तैयार

मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, असम के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल शिवसागर जिले के नेपाली खुटी गांव में अब तक करीब 220 सेमी-पर्मानेंट घर बनाए जा चुके हैं। ये घर बांस और टिन की छत से तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

असम हर वर्ष मानसून के दौरान भीषण बाढ़ की चुनौती का सामना करता है। भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि से हजारों परिवार प्रभावित होते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ती है। ऐसे समय में पुनर्वास और स्थायी आवास की व्यवस्था सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित आवास परियोजना का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत का अवसर देना है। घरों के निर्माण की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के समन्वय से पूरी की जा सकती है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंच सके।

सलमान खान इससे पहले भी विभिन्न सामाजिक और मानवीय कार्यों में योगदान देते रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े कई अभियानों में उनका सहयोग देखने को मिला है। असम बाढ़ पीड़ितों के लिए की गई यह पहल भी सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे प्रयास प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करते हैं और समाज में सहयोग तथा संवेदनशीलता का सकारात्मक संदेश भी देते हैं।

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