करोल बाग में फर्जी लग्जरी ब्रांड्स पर हाई कोर्ट सख्त

नकली सामान के कारोबार पर कार्रवाई तेज करने के पुलिस को निर्देश

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नई दिल्ली, 07 अगस्त 2026 । दिल्ली के प्रमुख कारोबारी क्षेत्र करोल बाग में नकली लग्जरी ब्रांड्स के कारोबार को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस को फर्जी ब्रांडेड उत्पादों की बिक्री और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामलों में प्रभावी एवं सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नकली उत्पादों का कारोबार न केवल प्रतिष्ठित कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) का उल्लंघन करता है, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी भी है।

स्ट्रीट वेंडर्स की याचिका पर सुनवाई

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिविजन बेंच ने 24 स्ट्रीट वेंडर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। इन वेंडर्स के पास वेंडिंग के प्रोविजनल सर्टिफिकेट थे। इन्होंने करोल बाग इलाके में वेंडिंग करते समय एमसीडी द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी। एमसीडी ने रिकॉर्ड पर ऐसी तस्वीरें पेश कीं, जिनसे पता चला कि कई याचिकाकर्ता अजमल खां रोड के उस हिस्से में भी सामान बेच रहे थे, जिसे ‘नो-वेंडिंग’ और ‘नो-हॉकिंग’ जोन घोषित किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया कि करोल बाग सहित कुछ बाजारों में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय और घरेलू लग्जरी ब्रांड्स के नाम पर नकली उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे हैं। ऐसे उत्पाद असली ब्रांड का लोगो, पैकेजिंग और डिजाइन अपनाकर ग्राहकों को भ्रमित करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और असली कंपनियों की साख भी प्रभावित होती है।

हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि ट्रेडमार्क कानूनों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में नियमित अभियान चलाए जाएं, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और नकली सामान की जब्ती सुनिश्चित की जाए। साथ ही संबंधित एजेंसियों को भी समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया गया है, ताकि इस तरह के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, नकली लग्जरी उत्पादों का बाजार ई-कॉमर्स और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में चुनौती बना हुआ है। ऐसे मामलों में जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान अधिकृत विक्रेताओं से ही सामान खरीदना चाहिए, बिल लेना चाहिए और उत्पाद की प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए।

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि अदालत के इस रुख से नकली ब्रांडेड सामान के कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इससे ईमानदारी से व्यापार करने वाले कारोबारियों को भी राहत मिलेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा।

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