BCCI ने खिलाड़ियों के फिटनेस मानकों को किया और सख्त

अब 5.20 मिनट में फिटनेस टेस्ट पास करना होगा, प्रदर्शन और चयन प्रक्रिया पर पड़ेगा असर

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नई दिल्ली, खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर मानकों को और कड़ा किए जाने की तैयारी है। रिपोर्टों के अनुसार, अब खिलाड़ियों को निर्धारित फिटनेस टेस्ट को 5 मिनट 20 सेकंड के भीतर पूरा करना होगा। इस नए मानक का उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मैदान पर प्रदर्शन को बेहतर बनाना है। माना जा रहा है कि इस बदलाव का सीधा असर टीम चयन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ेगा।

साथ ही 2 किलोमीटर दौड़ (2K टेस्ट) के लिए 9 से 10 मिनट की समय सीमा तय की गई है। पहले क्रिकेटरों की फिटनेस के लिए यो-यो टेस्ट होता था, लेकिन अब उसकी जगह ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिक फिटनेस टेस्ट बना दिया गया है।

बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने खिलाड़ियों में लगातार बढ़ती इंजरी और गिरते फिटनेस स्टैंडर्ड को देखते हुए यह बदलाव किया है। BCCI ने टीम मैनेजमेंट और मेडिकल टीम के बीच बेहतर तालमेल के लिए नए बेस पैरामीटर्स (न्यूनतम मापदंड) भी तय किए हैं।

फिटनेस टेस्ट किसी भी खिलाड़ी की गति, स्टैमिना, रिकवरी क्षमता और शारीरिक दक्षता का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। नए समय मानक लागू होने के बाद खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग में अधिक मेहनत करनी होगी। कोचिंग स्टाफ और फिटनेस विशेषज्ञ भी खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं, ताकि वे तय समय के भीतर टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक खेलों में तकनीकी कौशल के साथ-साथ उच्च स्तर की फिटनेस भी सफलता का प्रमुख आधार बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, इसलिए खिलाड़ियों के लिए बेहतर सहनशक्ति, तेज़ रिकवरी और निरंतर प्रदर्शन बनाए रखना आवश्यक है। इसी वजह से कई खेल संघ समय-समय पर अपने फिटनेस मानकों में बदलाव करते रहते हैं।

यदि यह नया नियम औपचारिक रूप से लागू होता है, तो चयन प्रक्रिया में फिटनेस का महत्व और बढ़ जाएगा। ऐसे खिलाड़ी जो निर्धारित समय सीमा पूरी नहीं कर पाएंगे, उन्हें अतिरिक्त प्रशिक्षण से गुजरना पड़ सकता है या चयन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, संबंधित खेल संस्था की ओर से अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही नियमों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त फिटनेस मानकों से खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर होगा और टीमों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी। इसके साथ ही खेल विज्ञान, पोषण, रिकवरी और नियमित फिटनेस मॉनिटरिंग की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

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