नई दिल्ली, 03 अगस्त 2026 । भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट को लेकर अपनी रणनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। दोनों देशों के बीच बंदरगाह के विकास, संचालन और भविष्य की परियोजनाओं को लेकर लगातार बातचीत जारी है। चाबहार पोर्ट को भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क को नई गति मिल सकती है।
चाबहार पोर्ट पर ईरान-भारत में वार्ता
इस मामले से जुड़े लोगों ने कहा कि सरकार चाबहार पोर्ट के मैनेजमेंट के लिए स्थानीय पोर्ट अथॉरिटी के साथ समझौता करने के लिए ईरान से बातचीत कर रही है। इसमें यह गारंटी होगी कि अमेरिकी प्रतिबंध हटने पर यह अधिकार वापस भारत को सौंप दिया जाएगा। भारत ईरानी सरकार से कानूनी गारंटी मांग रहा है ताकि दोनों पोर्ट अथॉरिटी के बीच हुए समझौते का पालन किया जा सके।
5 फैक्टर, भारत के लिए क्यों अहम ये पोर्ट
- जानकारों का कहना है कि चाबहार पोर्ट भारत की रणनीतिक पहुंच के लिए बहुत महत्वपूर्ण है
- अगर भारत किसी न किसी रूप में पोर्ट में अपनी भूमिका बनाए नहीं रखता है, तो चीन पोर्ट पर अपना दावा ठोक सकता है।
- पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती चुनौतियों के बावजूद, भारत ने पोर्ट में अपनी दिलचस्पी नहीं छोड़ी है।
- चाबहार पोर्ट न केवल अफगानिस्तान के लिए, बल्कि मध्य एशियाई देशों के लिए भी भारतीय और खाड़ी बाजारों तक पहुंचने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र का एक अहम रास्ता है।
- ऐसे में भारत अगर चाबहार प्रोजेक्ट से पीछे हटता है, तो अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक जमीनी व्यापारिक पहुंच बनाने का बड़ा मौका खो सकता है।
चाबहार बंदरगाह भारत की कनेक्टिविटी और व्यापार नीति का अहम हिस्सा है। यह परियोजना पाकिस्तान को बायपास करते हुए मध्य एशियाई देशों तक सामान पहुंचाने का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से भारत क्षेत्रीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित अगले कदमों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, भारत ने अपने रुख में संतुलन बनाए रखते हुए स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता, कूटनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में चाबहार पोर्ट का महत्व और बढ़ गया है। यदि यह परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक पहुंच और क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है। साथ ही यह बंदरगाह भारत-ईरान संबंधों को नई दिशा देने और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को विस्तार देने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।