2021 के मामले में आइशी घोष को राहत, कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट किया रद्द

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर लगी रोक

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नई दिल्ली, 30  जुलाई 2026 । दिल्ली की एक अदालत ने 2021 के एक मामले में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की संयुक्त सचिव आइशी घोष को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) रद्द कर दिया है। इससे पहले दिल्ली पुलिस वारंट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी। हालांकि अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान वारंट रद्द कर दिया गया, जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई पर रोक लग गई।

अदालत ने कहा कि पिछली सुनवाई में आइशी घोष “अपरिहार्य परिस्थितियों” की वजह से प्रजेंट नहीं हो सकीं। उनके वकील की दलील सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वारंट रद्द कर दिया। एसएफआई नेताओं के अनुसार, आइशी घोष अब गुरुवार को अदालत में पेश होंगी। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद से लेकर सियासी गलियारों तक बहस छेड़ दी है।

यह मामला वर्ष 2021 में दर्ज एक प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें आइशी घोष सहित अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद गैर-जमानती वारंट को निरस्त करने का आदेश दिया। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल आइशी घोष को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित तरीके से आगे जारी रहेगी।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह अदालत के आदेशों का पालन करते हुए कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं, आइशी घोष और उनके समर्थकों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे कानूनी प्रक्रिया में विश्वास की जीत बताया है। दूसरी ओर, मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि आइशी घोष छात्र राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रही हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-जमानती वारंट रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि मामला समाप्त हो गया है। इसका मतलब केवल इतना है कि संबंधित व्यक्ति को तत्काल गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं समझी गई। मामले की सुनवाई आगे भी अदालत में जारी रहेगी और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

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