कौन है गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला

इंडोनेशिया में गिरफ्तारी के बाद फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज

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गोरखपुर, 29  जुलाई 2026 । पंजाब से जुड़े कथित गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला को इंडोनेशिया में गिरफ्तार किए जाने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पते पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था, जिसकी मदद से वह अपनी पहचान छिपाकर विदेश में रह रहा था। अब भारतीय एजेंसियां उसकी भारत वापसी (प्रत्यर्पण) की प्रक्रिया और पूरे फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की जांच में जुटी हैं।

अमृतसर निवासी गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला हाल ही में इंडोनेशिया से पकड़ा गया। उस पर 5 लाख का इनाम घोषित था। उसने गोरखपुर के गोरखनाथ थाना क्षेत्र के एक एड्रेस पर अपना पासपोर्ट बनवाया और विदेश फरार हो गया। यह जानकारी होते ही पंजाब पुलिस की एक टीम गोरखनाथ थाना क्षेत्र के एड्रेस पर पहुंची।

गोरखपुर का एड्रेस किसने मुहैया कराया?

अब सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता करने में लगी हैं कि आखिर बिल्ला को गोरखपुर का एड्रेस किसने मुहैया कराया और पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेज किसने दिए। शक है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है और इस बात की भी जानकारी जुटाई जा रही है कि ऐसे और कितने लोगों के फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल कर डॉक्यूमेंट बनवाए गए हैं। इस संदर्भ में सत्यापन रिपोर्ट, पासपोर्ट आवेदन और पुराने रिकॉर्ड संबंधित जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला लंबे समय से विभिन्न आपराधिक मामलों में वांछित बताया जाता रहा है। उस पर संगठित अपराध से जुड़े कई मामलों में संलिप्त होने के आरोप हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विदेश भागने की आशंका के मद्देनजर उसके खिलाफ पहले से ही जांच चल रही थी। इंडोनेशिया में गिरफ्तारी के बाद अब उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर गोरखपुर के एक पते का उपयोग कर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पासपोर्ट बनवाने के दौरान किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, क्या इसमें किसी संगठित फर्जीवाड़ा गिरोह की भूमिका थी और इस प्रक्रिया में किसी सरकारी दस्तावेज या पहचान पत्र का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। यदि ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की पुष्टि की जा रही है। इंडोनेशिया से प्राप्त सूचनाओं, भारतीय एजेंसियों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क, आरोपी के आपराधिक संबंधों और उसके भारत प्रत्यर्पण को लेकर संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्रवाई कर रही हैं।

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