नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026 । कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने 1,511 कच्ची कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक (Ownership Rights) दिलाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अब प्रत्येक सप्ताहांत (वीकेंड) विशेष कैंप लगाने का निर्णय लिया है। इन कैंपों के माध्यम से लोगों को आवेदन भरने, आवश्यक दस्तावेज जमा करने और स्वामित्व संबंधी समस्याओं का मौके पर ही समाधान उपलब्ध कराया जाएगा।
- अधिकारियों के अनुसार, कैंपों में अच्छी भागीदारी दिख रही है।
- बड़ी संख्या में लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं, लेकिन आवेदन प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं।
- सबसे अधिक सवाल इस बात को लेकर आ रहे हैं कि नियमितीकरण में कितना शुल्क लगेगा और आगे कितनी राशि खर्च करनी होगी।
- लोगों को आवेदन की पूरी प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और शुल्क संबंधी नियमों की जानकारी दी जा रही है।
- सरकार ने 1,511 कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है।
- हालांकि, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बड़ी संख्या में लोग स्वगम पोर्टल पर ओनरशिप के लिए रजिस्ट्रेशन तो करा रहे हैं, लेकिन उसके बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड या जमा नहीं कर रहे हैं।
- इसके कारण आवेदन अधूरे रह जाते हैं और प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।
- अधिकारियों का कहना है कि आवेदन तभी स्वीकार होगा, जब सभी दस्तावेज जमा किए जाएंगे। हर जिले में पीएम-उदय सेल का भी गठन कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, पात्र निवासी 31 अक्टूबर तक मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पात्र आवेदकों को संपत्ति का कानूनी स्वामित्व प्रदान किया जाएगा। वीकेंड कैंपों का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, लोगों की भागीदारी बढ़ाना और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है।
अधिकारियों ने बताया कि इन कैंपों में राजस्व, नगर निकाय और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे, जो दस्तावेजों की जांच, आवेदन स्वीकार करने और लोगों की शंकाओं का समाधान करेंगे। जिन लोगों के दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन भी दिया जाएगा ताकि वे समय रहते आवेदन पूरा कर सकें।
सरकार का मानना है कि इस पहल से हजारों परिवारों को अपनी संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलेगा, जिससे वे भविष्य में बैंक ऋण, संपत्ति की खरीद-बिक्री, विरासत हस्तांतरण और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगे। साथ ही कच्ची कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को भी गति मिलेगी, जिससे शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में मदद होगी।