समस्तीपुर, 25 जुलाई 2026 । महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड बिहार के एक गांव का रहने वाला युवक है, जिसके पिता गांव में आटा-चक्की चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर संगठित नेटवर्क के जरिए परीक्षा की गोपनीयता भंग करने और अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की साजिश रची।
जंतर-मंतर से पटना तक प्रदर्शन के बीच हुई गिरफ्तारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, बिहार के पटना सहित कई जिलों में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद का माहौल था। इसी हलचल के बीच महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार में दबिश देकर इस बड़े अंतरराज्यीय माफिया को धर दबोचा।
कई राज्यों में चल रही थी विजेंद्र गुप्ता की तलाश
महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी आकाश पवार ने इस कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में विजेंद्र गुप्ता लंबे समय से पुलिस की पकड़ से फरार चल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही थीं। आखिरकार गुप्त सूचना के आधार पर उसे समस्तीपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए ठाणे के भिवंडी ले जाया गया है।
जांच एजेंसियां आरोपी के वित्तीय लेन-देन, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और बैंक खातों की गहन पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में कई राज्यों के लोगों की संलिप्तता हो सकती है। इसी कारण मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान कर उनसे पूछताछ की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरे मामले की व्यापक जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी, बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से लीक हुआ और इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की संरचना क्या थी।
इस मामले ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल निगरानी, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली और सख्त कानूनी कार्रवाई जैसे उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।