री-यूनियन पार्टी की तस्वीरों से बनाई अश्लील वीडियो

पुराने दोस्तों की करतूत से महिला की जिंदगी में मचा बवाल

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नई दिल्ली, 22 जून्‌ 2026 । दिल्ली में एक महिला के लिए वर्षों बाद स्कूल के दोस्तों के साथ री-यूनियन पार्टी करना किसी सजा से कम साबित नहीं हुआ। दोस्ती और भरोसे को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुराने दोस्तों पर री-यूनियन पार्टी की तस्वीरों का दुरुपयोग कर महिला की फर्जी अश्लील वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप लगा है। घटना के सामने आने के बाद पीड़िता और उसके परिवार को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल पार्टी के बाद एक वॉट्सऐप ग्रुप में सभी ने अपने फोटो शेयर किए, मगर किसी ने महिला के फोटो का इस्तेमाल कर उससे अश्लील विडियो बना दिया। यही नहीं इसके बाद उसे वॉट्सऐप पर वायरल भी कर दिया। फिलहाल महिला के आरोपों पर वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

  • पुलिस सूत्र ने बताया, 39 वर्षीय पीड़ित महिला राजौरी गार्डन इलाके में रहती हैं।
  • अपनी शिकायत में उन्होंने खुलासा किया कि कुछ महीने पहले उनके पुराने स्कूली दोस्तों का वॉट्सऐप पर एक री-यूनियन ग्रुप बना था।
  • बीती 1 मार्च को सभी दोस्त एक री-यूनियन पार्टी में मिले, जिसके बाद ग्रुप में कई तस्वीरें साझा की गईं।
  • आरोप है कि इन्हीं तस्वीरों में से महिला की फोटो निकालकर एक अज्ञात नंबर से 7 सेकंड का बेहद आपत्तिजनक और मॉर्फ्ड (फर्जी) विडियो क्लिप तैयार किया गया ।

जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले आयोजित एक री-यूनियन पार्टी में कई पुराने मित्र शामिल हुए थे। पार्टी के दौरान ली गई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया तथा निजी ग्रुपों में साझा किए गए थे। आरोप है कि इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल कर कुछ लोगों ने एडिटिंग और एआई तकनीक की मदद से महिला की आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर दी।

जब यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ग्रुप्स में वायरल होने लगी तो पीड़िता को इसकी जानकारी मिली। वीडियो देखने के बाद महिला ने इसे पूरी तरह फर्जी और छेड़छाड़ कर बनाई गई सामग्री बताया। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर अपराध के पहलू से जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वीडियो किस डिवाइस या अकाउंट से बनाई गई और सबसे पहले किसने उसे प्रसारित किया। डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से आरोपियों की पहचान की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस तरह के साइबर अपराधों में वृद्धि देखी जा रही है। किसी व्यक्ति की तस्वीरों या वीडियो का दुरुपयोग कर फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिए कड़ी कानूनी सजा का प्रावधान है।

इस घटना ने सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें साझा करने और डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। साथ ही यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि भरोसे का गलत फायदा उठाकर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना कितना गंभीर अपराध है।

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